हथनीकुंड बैराज पर भी काम पूरा नहीं हुआ है, जो काम करीब दो साल पहले मंजूर हुए थे, वे ही आज तक पूरे नहीं हो पाए हैं। इसके डाउन स्ट्रीम में काम होना था। इसके अधूरे होने से बैराज पर पानी का खिचाव बढ़ने पर खतरा हो सकता है। जिले में यमुना 53 किलोमीटर में बहती है।
यहां पर हथनीकुंड डिविजन, जगाधरी डिविजिन व एचकेवी डिविजन को बाढ़ बचाव कार्य करने थे। वहीं जगाधरी डिविजन ने छह करोड़ की लागत वाले सभी 21 काम पूरे कर लिए हैं। एचकेवी डिविजन को चार करोड़ की लागत से दो काम करने थे, इसमें सिर्फ एक पर काम चल रहा है।
अधिकारी जिम्मेदार: डीसी
डीसी मुकुल कुमार का कहना है कि काम तय समय पर पूरा कराने का प्रयास है। कहीं कमी रह जाती है तो संबंधित अधिकारी जिम्मेवार होगा।
पानीपत: 22 गांवों में पत्थरों की रेकिंग भी नहीं हुई
जिले में 16 जगहों पर पत्थर लगने थे, लेकिन अब तक पत्थरों की रेकिंग का काम ही 75% हुआ है। यानी पत्थरों को लगाने का काम तो शुरू ही नहीं हुआ है। यमुना किनारे के 22 गांव बाढ़ के खतरों में रहते हैं। इस बार चूंकि तामशाबाद में पत्थर नहीं लगाए जा रहे। इसलिए खतरा और बढ़ गया है। मिर्जापुर में 6, नन्हेड़ा में 5 और तामशाबाद में 5 जगहों पर पत्थर लगाने की प्लानिंग थी। ठेकेदार नरेंद्र मलिक का कहना है कि लॉकडाउन ने सारा गणित बिगाड़ दिया। मार्च में ही टेंडर प्रक्रिया हो गई थी, लेकिन लॉकडाउन की वजह से सब चौपट हो गया।
लॉकडाउन के कारण देरी
पानीपत के डीसी धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि कोरोना से सब कुछ प्रभावित हुआ है, पत्थर लगाने में भी लॉकडाउन की वजह से देरी हुई।
करनाल: 23 ठोकरों पर काम शुरू भी नहीं
करनाल में सिंचाई विभाग 13 नए और 10 पुराने स्टड यानी ठोकरों पर काम करा रहा है। करीब 5 करोड़ 33 लाख रुपए का खर्च आएगा। घरौंडा में भी बाढ़ बचाव कार्यों को लेकर प्रशासन गंभीर दिखाई नहीं दे रहा। फ्लड वर्क्स पूरे करने की डेड लाइन 30 जून है, बावजूद इसके काम शुरू नहीं हुआ है।
प्रशासन के तमाम दावों के उलट यमुना में स्टड व शैंक की रिपेयर शुरू नहीं हुई है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन नवतेज ने कहा कि तीन जगह ही काम शुरू हुआ है, दूसरी जगह पत्थर आ गया है, वहां जल्द काम शुरू कर देंगे।
सोनीपत: करीब 95 फीसदी काम पूरा
यमुना का जिले में 41.74 किमी क्षेत्र में यमुना का बहाव है। बरसात में ज्यादा पानी आने पर कटाव न हाे इसके लिए स्टड बनाए जा रहे हैं। 90 लाख के करीब का काम दिया गया था। इसमें बेगा घाट पर 55.46 लाख रुपए की लागत से चार स्टड बनाए जा रहे हैं। जबकि मीमारपुर में दाे स्टड करीब 8.46 लाख रुपए की लागत से बन रहे हैं। टिकाेला में भी स्टड का कार्य किया गया है। 30 जून तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। ठेकेदार द्वारा कार्य 95 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है।
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