मजदूरों ने कोरोना को तो हराया, लेकिन भूख के आगे घुटने टेक रही जिंदगी; बोले- 5 दिन में मिल रही राशन किट, जाे 2 दिन में खत्म हाे रही, 3 दिन क्या खाएं - OTA BREAKING NEWS

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Sunday, 28 June 2020

मजदूरों ने कोरोना को तो हराया, लेकिन भूख के आगे घुटने टेक रही जिंदगी; बोले- 5 दिन में मिल रही राशन किट, जाे 2 दिन में खत्म हाे रही, 3 दिन क्या खाएं

(विक्रम पूनिया)कैथल में सबसे ज्यादा काेराेना के 14 केस पंत नगर में मिले थे। मजदूरों ने कोरोना को तो हरा दिया, लेकिन अब जिंदगी भूख के आगे घुटने टेक रही है। यहां 125 गज के मकान में 4 परिवाराें के 22 सदस्य रहते हैं। एक परिवार में 5 से 6 सदस्य हैं। कोरोना को हराकर सभी 10 से 15 दिन पहले ही घर लौटे हैं, लेकिन मजदूरों का दर्द कुछ और है। ये घर लौटकर खुश नहीं हैं।

दो परिवारों के मुखिया पिंटू और सुभाष का कहना है कि प्रशासन चार से पांच दिन में एक राशन की किट देकर जाता है। किट में दो किलो आटा, एक किलो चावल, 250 ग्राम दाल, 500 ग्राम तेल, एक नमक की थैली और 50 ग्राम हल्दी दी जाती है।

अगर इस राशन को पकाकर पूरे परिवार को भरपेट खिलाया जाए तो ये एक या दो दिन चलेगा। वे बचे हुए तीन या चार दिन क्या खाएं। मजदूरों का कहना है कि वे अस्पताल में ही ठीक थे, क्योंकि वहां कम से कम भरपेट खाना मिल रहा था। वे खुद तो किसी तरह भूखे पेट संतोष कर लेते हैं, लेकिन चारों परिवारों में 10 के करीब छोटे बच्चे हैं, अब उनको क्या खिलाएं।

एसडीएम एवं नोडल अधिकारी कंटेनमेंट जोन कमलप्रीत कौर ने बताया कि जो गरीब व जरूरतमंद परिवार हैं, उनको राशन की किट दी जा रही है। अगर किट पर्याप्त नहीं है तो और राशन दिया जाएगा। उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं है, लेकिन वे इसका पता करेंगी और खाने के लिए पर्याप्त राशन मिले ये सुनिश्चित किया जाएगा।

बाहर मजदूरी करने के लिए दी जाए परमिशन
मजदूरों के घर के बाहर पुलिस कर्मचारी बैठा है, जो इन पर नजर रख रहा है। मजदूरों का कहना था कि वे बिना प्रशासन की परमिशन के बाहर जाना भी नहीं चाहते हैं, क्योंकि उन्हें केस दर्ज होने का डर है। उनकी मांग है कि या तो उन्हें भरपेट भोजन दिया जाए या बाहर मजदूरी करने की परमिशन, ताकि वे अपने बच्चों का पेट भर सकें। मजदूरों ने कहा कि जिन लोगों से कर्ज लेकर मकान बनाया था, अब वे भी रुपए मांग रहे हैं। ऐसे में अब वे कहां से रुपए लाएं।

हाथ धोने काे साबुन तक नहीं
प्रशासन शुरुआत में राशन किट में साबुन देने के दावे भी करता रहा है। लोगों से साफ-सफाई रखने की अपील की। लेकिन मजदूरों का कहना है कि जब से वे लौटे हैं प्रशासन ने मास्क और सेनिटाइजर तो दूर की बात है हाथ धोने के लिए एक साबुन तक नहीं दिया है। उनके आने से पहले का मालूम नहीं। बस्ती में पास एकाध घर है। ऐसे में खाली एरिया में गंदगी बहुत है, लेकिन उनके घरों को सेनिटाइज भी नहीं किया गया है।

सता रही नवजात बच्चे की चिंता
एक परिवार में नया बच्चा भी घर में आया है, लेकिन परिवार खुश होने की बजाय चिंता में डूब गया। चिंता इसलिए क्योंकि घर में मां को खिलाने के लिए भरपेट खाना तक नहीं है। ऐसे में मां और बच्चा कैसे स्वस्थ रहेंगे। सुभाष ने बताया कि बच्चे की मां को दूध तक पिलाने को नहीं मिल रहा है। ऐसे में बच्चे को मां क्या पिलाएगी।

जगह कम होने से फैला था संक्रमण
पंतनगर में 26 मई को एक परिवार बहादुरगढ़ से शादी से लौटा था। 29 मई को जांच में पिंटू की पत्नी और उसके दो बच्चे कोरोना पॉजिटिव मिले, इसके बाद 14 केस सामने आए। 125 गज के मकान में चार परिवार रहते हैं। जगह कम होने से संक्रमण तेजी से फैला था।



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कैथल | पंत नगर में क्वांरेंटाइन मकान में रह रहे लोग अपना दर्द बताते हुए।


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