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Monday, 18 June 2018

कभी दिहाड़ी देने के 17 रूपए नहीं होते थे तो खुद करते थे मजदूरी, अब उठाते हैं गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्च

नई दिल्ली. ये एक ऐसे पिता और बेटे की कहानी है जिन्होंने दूसरों की मदद को ही अपना सपना बना लिया था। बेटे का नाम है - मिर्जा कमरुल हसन बेग। चार साल पहले इन्होंने अपने दोस्त देवेंद्र रावत के साथ मिलकर जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के गरीब बच्चों की मदद के लिए एक फंड शुरू किया। इसका मकसद जामिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने का ख्वाब देखने वाले जरूरतमंद गरीब बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाना है। पिछले चार साल में इस फंड से करीब 400 से ज्यादा छात्रों की पूरी फीस भरी जा चुकी है।

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