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Saturday, 11 January 2020

40 की उम्र के बाद लोगों में बढ़ती शुगर डाल रही रेटिना पर दुष्प्रभाव

रोहतक.असंयमित लाइफस्टाइल शहर में रह रहे लोगों का शुगर रोग से ग्रस्त कर रहा है। 40 वर्ष की उम्र के बाद लोगों में हो रही शुगर की शिकायत उनकी आंखों की रेटिना पर दुष्प्रभाव डाल रही है। इसकी वजह से शुगर पीड़ित मरीजों की आंखों के रेटिना में दिक्कत आने से धुंधला दिखाई पड़ने की शिकायत बढ़ी है।


पीजीआई के क्षेत्रीय नेत्र रोग संस्थान में संचालित ओपीडी में मरीज रेटिना में दिक्कत आने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों ने रोजाना 25 से ज्यादा नए केस रेटिना में खराबी आने के होने का दावा किया है। वहीं एक माह में 25 के करीब मरीजों में रेटिना की सर्जरी की जा रही है।


ग्रीन लेजर मशीन के जरिए अब तक एक साल में 300 से ज्यादा मरीजों में रेटिना की सर्जरी की जा चुकी है। पीजीआई के एसोसिएट प्रोफेसर व रेटिना सर्जन डॉ. जितेंद्र फौगाट बताते हैं कि डायबिटीज रेटिनोपैथी से पीड़ित लोगों को लगातार आंखों की जांच कराती रहनी चाहिए। कम-से-कम साल में एक बार यह जरूर हो। जिन लोगों को ज्यादा उम्र में डायबिटीज हुई है, उन्हें 6 माह में आंखों की जांच करानी चाहिए।

पीजीआई में फ्री होती है जांच
पीजीआई के क्षेत्रीय नेत्र रोग चिकित्सा संस्थान में मरीजों को आंखों के परदे की जांच के लिए ओसीटी व एंजियोग्राफी जांच की सुविधा दी जा रही है। प्राइवेट अस्पतालों में ओसीटी या एंजियोग्राफी की जांच के तीन से पांच हजार रुपए मरीजों को खर्च करना होता है। जबकि पीजीआई के नेत्र रोग विभाग में 35 लाख रुपए की मशीन के जरिए मरीजों को निशुल्क जांच सुविधा दी जा रही है।

डायग्नोसिस व लेजर उपचार
डायबिटीज की जांच करने के लिए पूरी आंख की जांच करना जरूरी होता है। रेटिना की जांच करने के लिए एक उपकरण इनडायरेक्ट ऑप्थेलमोस्कोप का प्रयोग होता है। यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो फ्लोरीसीन एंजियोग्राफी की जाती है। इससे यह पता चल पाता है कि लेजर से उपचार करने की जरूरत कहां-कहां है। यदि लीकेज या नए ब्लड वेसल्स मिलते हैं तो तुरंत लेजर ट्रीटमेंट मरीज को मिलना चाहिए।

वीट्रेक्टॉमी तकनीक से आंखों में फैला खून हटाया जाता है
लेजर फोटोकॉग्युलेशन में लेजर एक पावरफुल बीम इफैक्टेड रेटिना पर डाली जाती है। रेटिना पर मौजूद ब्लड वेसल्स लीक करना बंद करती है, साथ ही असामान्य ब्लड वेसल्स बनना बंद हो जाता है। जब मरीज को डायबिटिक रेटिनोपैथी एडवांस स्टेज में रहती है, तो उसका माइक्रो-सर्जिकल ऑपरेशन करना होता है। इसे विट्रेक्टॉमी कहा जाता है। आंखों में फैले खून को हटाने से आंखों की रोशनी ठीक हो जाती है।



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पीजीआई में मरीज की आंखों की जांच करते डाॅक्टर।


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