चंडीगढ़ (मनोज कुमार).सिरसा के थेहड़ में अतिक्रमण कर रह रहे लोगों को हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में शिफ्ट करने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। यहां 56 लोगों ने 2-2 फ्लैट ले लिए तो 3 ऐसे भी लोगों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने 3-3 फ्लैटों पर हाथ मार लिया। प्रशासन ने बिना जांच किए 788 परिवारों को बोर्ड के फ्लैट दिए थे। करीब 550 लोगों को पटवारी के हस्ताक्षर से फ्लैट दिए गए हैं।
पुनर्वास की जिम्मेदारी ऑर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम डिपार्टमेंट पर सौंप कर हाउसिंग बोर्ड ने 137.34 करोड़ रुपए की डिमांड की थी। ये वही फ्लैट हैं, जिनकी ऑक्शन 7.50 लाख रुपए में करने पर भी 1260 फ्लैटों में सिर्फ 5 ही बिके थे, जबकि बोर्ड ने डिपार्टमेंट से इनकी कीमत 17.43 लाख रुपए मांगी। इस पर डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेट्री अशोक खेमका ने लिखा था कि अतिक्रमणकारियों को फ्लैट देना उन्हें अवॉर्ड देना है।
उन्होंने डीसी सिरसा और हाउसिंग बोर्ड से शिफ्ट किए लोगों की जानकारी मांगी तो सिरसा डीसी ने उन्हें रिपोर्ट भेजी है। सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कितने लोगों ने दो या इससे ज्यादा भी फ्लैट हथिया लिए हैं। फ्लैट लेने के बाद ज्यादातर पर ताले लगे हैं। अब यह रिपोर्ट आर्कियोलाजी डिपार्टमेंट से सरकार के पास जाएगी। इस मामले में सिरसा के डीसी एके गर्ग का कहना है कि थेहड़ पर रहने वाले लोगों को शिफ्ट करने की जानकारी मांगी गई थी, वह हमने भेज दी है।
जानिए कब क्या हुआ: पिछले साल जनवरी में शुरू हुई थी शिफ्टिंग को लेकर बैठक, फिर बोर्ड ने भेजी डिमांड
पिछले साल फरवरी में एक मीटिंग हुई। इसमें सीएम की ओर से उनके प्रतिनिधि एडिशनल प्रिंसिपल सेक्रेट्री वी उमाशंकर मौजूद रहे। इनके अलावा ऑर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट व अन्य विभागों के अफसर मौजूद रहे। यहां वी उमाशंकर ने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेश हैं कि हाउसिंग बोर्ड से ऑर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम डिपार्टमेंट जरूरत के हिसाब से फ्लैट लेकर थेहड़ पर रहने वालों का पुनर्वास करे।
यहां बोर्ड से डिपार्टमेंट को फ्लैट शिफ्ट करने में एचएसवीपी की ओर से नगर निकायों को सेक्टर ट्रांसफर करने के नियम लागू होंगे। पैसाें का प्रस्ताव डिपार्टमेंट, फाइनेंस डिपार्टमेंट को भेजेगा। उन्होंने कहा कि सीएम चाहते हैं कि यह स्कीम मार्च से पहले आनी चाहिए। इसमें पहले ही देरी हो चुकी है। इसके बाद 788 परिवारों को शिफ्ट किया गया। इसी बीच में हाउसिंग बोर्ड ने 137 करोड़ रुपए की डिमांड ऑर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम डिपार्टमेंट से कर दी गई।
137 करोड़ रुपए की डिमांड पर ऑर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट की रोक
नवंबर में आईएएस के ट्रांसफर होने के बाद अशोक खेमका ऑर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेट्री बने। मामला सामने आने के बाद 6 दिसंबर को नोटिंग फिर चली। इसमें उन्होंने लिखा कि जो 137 करोड़ रुपए की डिमांड की गई है, उसमें कुछ सूचना नहीं है। लिखा कि जो सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हैं, उनका पुनर्वास करना डिपार्टमेंट के नियमों में नहीं है। यह पब्लिक मनी का गलत इस्तेमाल है।
ऐसी पॉलिसी बनाते हैं तो द पब्लिक प्रसिसिस एक्ट-1971 में संशोधन की जरूरत पड़ेगी। आगे लिखा कि कोई भी निर्णय लें उससे पहले बोर्ड यह बताए कि थेहड़ से जो परिवार शिफ्ट किए गए, उसका क्या सबूत है, जो 467 खाली फ्लैट हैं, उनकी वर्तमान में नीलामी की जाए तो किस रेट पर होगी। लोगों को फ्लैट देने के अलॉटमेंट लेटर दिए जाएं। यह जानकारी उन्होंने सिरसा डीसी से भी मांगी थी।
खेमका ने बाहरी लोगों की बैठकोंमें मौजूदगी पर जताई थी आपत्ति
अशोक खेमका ने नोटिंग में बैठकों में कुछ लोगों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए थे। 3 दिसंबर को ही सचिवालय में डिप्टी सीएम, ऑर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट, सीएस और एफसीआर की मौजूदगी में मीटिंग हुई थी। इसमें सीएम के पूर्व राजनीति सलाहकार जगदीश चौपड़ा भी मौजूद थे। उनकी मौजूदगी को उन्होंने नियमों के विपरीत बताया। इसी प्रकार 9 दिसंबर की नोटिंग में उन्होंने लिखा था कि 26 अक्टूबर, 2017 को इसी मामले को लेकर हुई मीटिंग में गुड़गांव का एक प्रॉपर्टी डीलर भी मौजूद था।
फ्लैट की क्वालिटी पर भी उठे सवाल
सिरसा के जिन फ्लैट में लोगों को शिफ्ट किया गया, उनकी क्वालिटी पर भी सवाल उठे। ऑर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेट्री ने नोटिंग में एक जगह लिखा है कि ये फ्लैट 7.50 लाख रुपए में भी नहीं बिके। इनकी क्वालिटी पुअर लगती है। कंस्ट्रक्शन से लेकर वर्क टेंडर, सुपरविजन और अतिक्रमणकारियों को फ्लैट देने में भी स्कैम दिखता है।
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