नई दिल्ली .जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) कैंपस में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत 9 छात्रों को पहचानने का दावा किया है। लेकिन दिल्ली पुलिस से सवाल यह है कि 5 जनवरी की घटना को अंजाम देने वाले नकाबपोश कौन हैं? जिन्होंने जेएनयू हॉस्टल में मारपीट की थी। पुलिस द्वारा जारी तस्वीरों में हाथ में रॉड लिए हॉस्टल में तांडव मचाने वाले शख्स नजर नहीं आ रहे हैं। हिंसक झड़प मामले में क्राइम ब्रांच के सामने तफ्तीश के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। सूत्रों की माने तो 1 से 5 जनवरी की यह हिंसक घटना पूरी सोची समझी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
इस हिंसक घटना को अंजाम देने वालों ने टेक्नोलॉजी का भी भरपूर उपयोग किया। उन्हें मालूम था कि वह किस तरह टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए पुलिस से बच सकते हैं। घटना से पूर्व कुछ वॉट्सएप ग्रुप बनाए गए थे। इनमें से 2 वॉट्सएप ग्रुप में ही 60 से ज्यादा लोगों को ग्रुप एडमिन बनाया गया था। एक ग्रुप रविवार शाम 7 बजे वाली साबरमती हॉस्टल वाली हिंसा से ठीक पहले करीब 5 बजे बना। इसमें करीब 60 लोग शामिल हैं, जिनमें से 37 की पहचान हो चुकी है। एसआई टीम के हेड जॉय टिर्की कि वायरल वीडियो के जरिए आरोपियों की पहचान की है।
जेएनयू के 3 प्रोफेसरों ने खटखटाया दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा
जेएनयू में रविवार को हुई हिंसा को लेकर जेएनयू के तीन प्रोफेसरों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जेएनयू के तीन प्रोफेसरों ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें जेएनयू कैंपस में हुई हिंसा से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, डाटा और साक्ष्य को सुरक्षित रखने की मांग की है। गौरतलब है कि पांच जनवरी को कुछ नकाबपोश लोगों ने विश्वविद्यालय परिसर में घुसकर छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था। वहीं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में पिछले हफ्ते हुए हमले के सिलसिले में दिल्ली पुलिस को तीन और शिकायतें मिली हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
जेएनयू में नकाबपोशों को कैंपस में दाखिल कराने के आरोप में पोस्टरवार
लेफ्ट संगठनों ने चार प्रोफेसर की फोटो वाला पोस्टर चिपकाकर आरोप लगाया है कि इन लोगों ने नकाबपोशों को कैंपस में प्रवेश कराया है। उसमें जेएनयू चीफ प्रोक्टर प्रो. धनंजय सिंह, साबरमती हॉस्टल की वार्डन प्रो. प्रकाश चंद्र साहू, प्रो. तपन बिहारी और डीयू प्रो. अभिनव प्रकाश के नाम व फोटो शामिल हैं। शिक्षकों ने आरोप को नकारा है। छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा है कि नकाबपोश भीड़ को कैंपस में इन्हीं चारों की मिलीभगत से एंट्री हुई है।
एबीवीपी बोली- हमला करने वाले खेल रहे थे विक्टिम कार्ड, अब सबकुछ साफ हो गया
एबीवीपी ने हिंसा में खुद के शामिल होने से इनकार करते हुए कहा है कि वह जांच में दिल्ली पुलिस का हर तरह से सहयोग के लिए तैयार है। दिल्ली पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बाद एबीवीपी ने भी पीसी कर जेएनयू हिंसा के लिए लेफ्ट को जिम्मेदार ठहराया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कहा कि पुलिस के खुलासे के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जिन लोगों ने हिंसा की वे लोग विक्टिम कार्ड खेल रहे थे।
एचआरडी सेक्रटरी ने छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन से अलग-अलग मुलाकात की
शुक्रवार को जेएनयू प्रशासन के साथ-साथ छात्रों के प्रतिनिधियों का अलग-अलग पक्ष सुना। मानव संसाधन मंत्रालय के सचिव अमित खरे को जेएनयू प्रशासन ने बताया कि 13 जनवरी से यूनिवर्सिटी में कक्षाओं को शुरू करने का फैसला किया गया है। मानव संसाधन मंत्रालय के सचिव अमित खरे से शुक्रवार को पहले जेएनयू वीसी समेत यूनिवर्सिटी प्रशासन की 5 सदस्यीय टीम ने मुलाकात की।
‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’
केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि कांग्रेस नेताओं का यह कहना कि जेएनयू में हिंसा सरकार एवं मानव संसाधन विकास मंत्री की तरफ से प्रायोजित है, बिल्कुल उल्टा चोर कोतवाल को डांटे जैसा है। जावड़ेकर ने कहा, नकाब पहनकर दो दिन पहले सर्वर सर्वर रूम तोड़ा गया।
हिंसा की जांच संदिग्ध : माकन
पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने जेएनयू हिंसा मामले की जांच को संदिग्ध बताने के साथ दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक को तत्काल हटाने की मांग की है। प्रेस कांफ्रेंस में माकन ने कहा, पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से जांच नहीं की गई।
पुलिस मूकदर्शक है: वृंदा करात
सीपीआई (एम)पोलित ब्यूरो की मेंबर वृंदा करता ने कहा कि पुलिस गृहमंत्री शाह के इशारे पर काम कर रही है। सच्चाई यह है कि एबीवीपी और आरएसएस समर्थकों के हमले पर पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।
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