नई दिल्ली (पवन कुमार).हम जिस पशु को पालते हैं, उससे अक्सर हमारा बेहद लगाव हो जाता है। फिर हमारा पालतू पशु अगर तकलीफ में हो तो वही तकलीफ हमें भी होती है। इस तरह का मानव और पशु प्रेम का नजारा गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में भी देखने को मिला। एक हथिनी से जुदा कर दिए गए महावत सद्दाम ने उसे वापस पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दी। महावत ने गुहार लगाई- ‘जज साहब! मुझे मेरी लक्ष्मी से जुदा कर दिया गया है। मुझे उससे वापस मिलवा दीजिए। लक्ष्मी मेरी हथिनी है।’ उसकी याचिका को देखकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे भी हैरानी में पड़ गए। उनका हैरान होना लाजिमी भी था, क्योंकि महावत ने अपनी हथिनी को पाने के लिए जिस बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के विकल्प का सहारा लिया था, वह विकल्प केवल देश के नागरिकों के संबंध में ही लागू होता है। इसलिए उन्होंने उस याचिका पर सुनवाई करने से ही मना कर दिया।
चीफ जस्टिस बोबडे ने महावत से पूछा- ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का विकल्प एक हाथी के मामले में कैसे लागू हो सकता है? क्या हथिनी भारत की नागरिक है? हम आपकी याचिका पर कैसे सुनवाई कर सकते हैं? आपने जो विकल्प अपनाया है, वह भारत के नागरिकों के लिए है। हम आपकी याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे।’ सद्दाम ने अपनी याचिका में कहा था कि वह और उसकी हथिनी पिछले 10 साल से साथ-साथ थे। वह उसके परिवार के सदस्य की तरह है। उससे उसकी मानवीय संवेदनाएं भी जुड़ी हुई हैं। सितंबर 2019 को वह अपनी हथिनी लक्ष्मी के साथ एक शिविर में जा रहा था। उसे बीच रास्ते में वन विभाग के अधिकारियों ने रोका और उस पर वन्य जीव अधिनियम के तहत कार्रवाई कर लक्ष्मी को अपने साथ ले गए। लक्ष्मी को हरियाणा के एक पुनर्वास केंद्र में रखा गया है। उसने लक्ष्मी को वन विभाग के अधिकारियों के कब्जे से मुक्त कराने की कोशिश भी की, जिस पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। वह 25 नवंबर को जेल से रिहा हुआ है।
महावत ने कहा- परिवार के लोग लक्ष्मी के बिना रह नहीं पा रहे
सद्दाम ने कहा- वह अपनी लक्ष्मी से अलग होकर परेशान है। उसके परिवार के लाेग भी लक्ष्मी के बिना नहीं रह पा रहे हैं। जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो उसने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की। उसने याचिका में कहा- कोर्ट हथिनी के साथ रिश्ते और उसकी संवेदनाओं को समझते हुए वन विभाग को तुरंत लक्ष्मी को रिहा कर उसे सौंपने का आदेश जारी करे।
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