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Thursday, 20 February 2020

बुंदेलखंड में भी महादेव की 'काशी', यहां बेतवा के तट पर 108 मंदिर, पर्यटन के लिए समृद्ध ये क्षेत्र

हमीरपुर. विविधताओं से भरे हमीरपुर जिले में बेतवा नदी के किनारे बसे जलालपुर में एक या दो नहीं, बल्कि 108 शिव मंदिर हैं। इसीलिए इस क्षेत्र को 'बुंदेलखंड का काशी' कहा जाता है। कारण यहां की बसावट व घाट काशी के घाटों जैसे ही हैं। इन मंदिरों का निर्माण किसी सेठ ने कराया था। अन्य प्रदेशों से व्यापारी जलमार्ग से होते हुए यहां पहुंचते थे और उनके ठहराव का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। यहां बने मंदिर आस्था केंद्र तो हैं ही, पयर्टन की दृष्टि से भी समृद्ध है। शुक्रवार, 21 फरवरी को शिवजी और माता पार्वती की पूजा का महापर्व शिवरात्रि है। इस दिन श्रद्धालु इन महादेव मंदिरों में जप-तप व इनकी परिक्रमा करते हैं।

फकीर ने बसाया था गांव, आज तहसील बन चुकी

कहा जाता है कि, 11वीं शताब्दी में हमीरपुर जिले में जलालपुर गांव को एक फकीर जलाल खां बाबा ने बसाया था। जिनकी मजार भी यहां स्थापित है। बाद में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान इसे व्यापार के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनाया गया। उस समय व्यापार नदियों के रास्ते होते थे। व्यापार से जुड़ी चीजों का सफर जलमार्ग से भोपाल से शुरू होता था और यहीं जलालपुर में खत्म होता था। यहां से बड़े बड़े व्यापारी और सेठ गुजरते थे। तमाम व्यापारी यहीं ठहरते थे। मान्यता के अनुसार, किसी सेठ की मनोकामना पूर्ण होने पर उसने यहां 108 मंदिर का निर्माण कराया था। लेकिन व्यापारी ने कहीं भी अपने नाम का कोई पत्थर नहीं लगवाया।

खंडहर में तब्दील मंदिरों को सहेजने की जरूरत

लेकिन समय बीतने के साथ ये मंदिर जर्जर हो चुके हैं। कुछ मंदिरों से महादेव समेत अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं चोरी हो चुकी हैं। मंदिर खंडहर में तब्दील भवन के रूप में हैं। हर साल शिवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण पर्वों पर यहां हजारों पर्यटक व श्रद्धालु आते हैं। लेकिन अतीत की बुलंदियों की गाथा व धरोहरों को सेहजने की कवायद नहीं शुरू हो सकी। जलालपुर को तहसील का दर्जा भी मिल चुका है।



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नदी किनारे स्थापित शिव मंदिर।


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