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Sunday, 8 March 2020

पेड़-पर्यावरण बचाने की मुहिम, गोबर से बने लॉग्स से करेंगे होलिका दहन, गोशालाओं से लॉग्स बनवा रहे आईआईटी दिल्ली के स्टूडेंट्स


पेड़ और पर्यावरण को बचाने की मुहिम के तहत इस साल दिल्ली-एनसीआर में 20 से ज्यादा जगह होलिका दहन लकड़ी से न कर गोबर से बने लॉग्स से होगा। गोबर से बने ये लॉग्स उन जगहों पर पहुंच भी गए और कुछ जगहों पर इन्हें सजा भी दिया है। यह लॉग्स आईआईटी दिल्ली के छात्रों के एक ग्रुप ने लोगों को उपलब्ध कराए हैं। गाय के गोबर से बने लॉग्स से होलिका दहन दिल्ली में साउथ दिल्ली के वसंतकुंज की कई सोसायटियों, ग्रेटर कैलाश, आरकेपुरम और मयूर विहार में होगा। इसके अलावा नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गाजियाबाद में भी गोबर के लॉग्स से होलिका दहन होगा। दिल्ली-एनसीआर में 20 जगह होने वाले होलिका दहन कार्यक्रमों के लिए 5000 किलो गोबर के लॉग्स भेजे गए हैं। लॉग्स की मात्रा से साफ है कि कम से कम इतनी लकड़ी तो जलने से बचेगी ही।

लाभ: गोबर का निस्तारण भी होता है और गोशाला को आय भी

आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने पेड़ों को कटने और पर्यावरण को दूषित से बचाने के लिए साल 2018 में अर्थ नाम से ग्रुप शुरू किया था। ग्रुप के अध्यक्ष और आईआईटी दिल्ली में बी-टेक फोर्थ ईयर के छात्र नमन भार्गव ने कहा कि हमारी कोशिश है कि लकड़ी कम से कम जले। होलिका दहन और अंतिम संस्कार में लकड़ी का इस्तेमाल होता है। इनकी जगह गोबर के लॉग्स का इस्तेमाल हो सकता है। इसके अलावा भी ऐसे काम होंगे जिनमें लकड़ी जलाई जाती होगी। इन सब कामों में लॉग्स का इस्तेमाल हो सकता है। लॉग्स गोशालाओं से बनवा रहे हैं। दिल्ली के बवाना की श्रीकृष्ण गोशाला में लॉग्स बनाए जा रहे हैं। गोशाला को कम कीमत पर मशीन उपलब्ध कराई है। लॉग्स बेचकर गोशाला को फायदा तो होता ही है। साथ ही गोबर के निस्तारण की समस्या भी दूर हो जाती है। निस्तारण भी एक बड़ी समस्या है। हमारे ग्रुप में 18 छात्र हैं। सभी बीटेक के अलग-अलग साल में हैं।

लॉग्स से प्रदूषण होता है कम, लकड़ी के मुकाबले सस्ते

दिल्ली-एनसीआर में 20 से ज्यादा जगह गाय के गोबर से बने लॉग्स से होलिका दहन


बी-8, वसंतकुंज सोसायटी की आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष अरुण रोंगटा ने कहा कि आईआईटी के बच्चों ने हमें बताया कि लॉग्स से प्रदूषण कम होता है क्योंकि जलने के बाद राख जमीन पर ही रह जाती। यदि हम पर्यावरण को सुरक्षित रखने में कुछ योगदान दे सकते हैं तो देना चाहिए। फिर लकड़ी के मुकाबले ये लॉग्स सस्ते भी हैं। पहली बार लॉग्स से होलिका दहन करेंगे, देखते हैं कैसा अनुभव आता है। वसंतकुंज की ही बी-5-6 सोसायटी की महासचिव अमीना तलवार ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जो भी हो सकता है हम करते आए हैं। हमें बताया कि लकड़ी न जलाकर गोबर के लॉग्स जलाने से प्रदूषण कम होगा इसलिए हमने लॉग्स से होलिका दहन का फैसला किया है।



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Faridabad News - trees to save environment holika dahan to do logs made of cow dung iit delhi students who are making logs from cow sheds
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