गांव जगाण-चिकनवास मार्ग स्थित एक निर्माणाधीन फैक्ट्री में 14 फीट गहरे निर्माणाधीन वाटर टैंक की दीवार गिरने से पति-प|ी और उनके 4 वर्षीय बच्चे सहित चार लोगों की मलबे के नीचे दबने से मौत हो गई। निर्माणाधीन वाटर टैंक की दीवार गिरने से हुए हादसे में मारे गए दंपति के परिवार में उनकी मासूम बेटी बची है।
मौके पर पहुंचे जींद जिला के गांव बिधराना निवासी मजदूर ने बताया कि वह निर्माणाधीन टैंक के बाहर था और अंदर हरिप्रसाद, उसकी प|ी सोनिया, लक्ष्मी टैंक के लिए काम कर रही थे। अचानक उसने धमाके की आवाज सुनाई दी तो वह भागकर गया तो मासूम बच्ची चिल्ला रही थी कि मैल्ला भैइया माटी में दब गया। उसने बताया कि यहां पर है। शोर सुनकर अन्य मजदूर भी भागकर आए और जेसीबी की सहायता से मलबे को हटाया। सबसे पहले चार वर्षीय बच्चे को मलबे से निकाला। उसके बाद तीनों लोगों को निकाला। जब हरिप्रसाद को निकाला तो वह बोल रहा था। मलबे से निकाला तो हरिप्रसाद को होश था और बोला कि मेरा बेटा-बेटी और प|ी कहां हैं। उसने बेटे को देख लिया और कहा कि मेरा बेटा चिंटू मर गया है। इतना कहते ही बेहोश हो गया। पुलिस ने एंबुलेंस मंगवाकर तुरंत चारो लोगों को बेहोशी की हालत में मेडिकल कॉलेज अग्रोहा में भर्ती कराया। जहां पर चिकित्सकों की टीम ने चारों को मृतक घोषित कर दिया। मृतक हरिप्रसाद का परिवार होली पर अपने घर मध्यप्रदेश चला गया था और 17 मार्च को वह होली मनाकर वापस काम पर आया था और तीन दिन बाद ही यह हादसा हो गया। वही धनीराम उर्फ विक्रम भी होली पर अपने गांव गया था और उसकी प|ी व तीन बच्चे यही फैक्ट्री में थे। वह जब फैक्ट्री में पहुंचा तो दीवार गिर चुकी थी और उसकी प|ी लक्ष्मी रानी मलबे के नीचे दबकर मर चुकी थी। वह भी हादसे को देखकर सहमा रह गया। वह घर से चने का बेसन, बीड़ी बनाने की पती व अन्य घरेलू सामान लेकर आया। धनीराम ने बताया कि तीन दिन पहले घर से चलने पहले अपनी प|ी से बात हुई तो उसने कहा कि बेसन, बीड़ी बनाने वाली पती ले आना। वह मध्यप्रदेश से ही बेसन व अन्य सामान लेकर आया, लेकिन हादसे को देखकर सामान वहीं का वहीं रह गया। हरिप्रसाद के जीजा ने रणजीत ने बताया कि हरिप्रसाद सबसे छोटा है और वह पिछले तीन वर्षों से परिवार सहित हरियाणा में मजदूरी करने आया हुआ है।
सुरेंद्र बोला- बच्ची चिल्ला रही थी मैला भाई माटी में नीचे दब गयो
जींद जिला के गांव बिधराना निवासी मजदूर सुरेंद्र ने बताया कि वह निर्माणाधीन टैंक के बाहर था। मासूम की बच्ची चिल्ला रही थी कि मैल्ला भैइया माटी में दब गया। उसने बताया कि यहां पर है। शोर सुनकर अन्य मजदूर भी भागकर मदद के लिए आए थे। हादसे के समय वह अपने भाई से कुछ ही कदम दूरी पर थी। उसने मौके पर मौजूद मजदूर परिवारों को चिल्लाकर हादसे की जानकारी दी। मासूम बच्ची अपनी झोपड़ी के दरवाजे पर बैठी मां-बाप व भाई चिंटू का इंतजार करती रही। कह रही थी कि मैला चिंटू भईयां आएगा। उसे क्या पता कि अब उसका भाई चिंटू व मां-बाप वापस आने वाले नहीं है। पुलिस ने मासूम बच्ची को अपने पैतृक गांव गादर दादा-दादी के पास भेज दिया है। माैके पर चाइल्ड वेलफेयर से भी सुनीता व दवेंद्र सिंह माैके पर पहुंचे अाैर बच्ची के बारे जानकारी हासिल की।
कब-कहां पर हुए एक माह में हादसे
{17 फरवरी को पाबड़ा गांव के सरकारी स्कूल को कंडम भवन गिरने से उकलाना निवासी सन्नी व बिठमड़ा निवासी शीला नामक महिला की मौत।
{18 फरवरी को आदमपुर में दीवार के नीचे दब कर चुली निवासी रमेश की मौत।
{20 मार्च को चिकनवास गांव में फैक्ट्री के मलबे की नीचे दबने से एक बच्चे सहित चार लोगों की मौत।
क्षेत्र में एक महीने में तीसरा हादसा, मिस्त्री सहित 7 की हो चुकी मौत
सुरेश दुर्जनपुरिया ने बताया कि कंस्ट्रक्शन का जहां पर काम चलता है। वहां पर सेफ्टी एंड हेल्थ डिपार्टमेंट का कोई भी कर्मचारी व अधिकारी जांच के लिए नहीं जाता है। इसके लगातार ये हादसे हो रहे हैं। ठेकेदार व मैनेजमेंट मजदूरों का शोषण कर रही है। जोकि चिकनवास में हादसा हुआ है और चार लोगों की जान चली गई है। इससे पहले भी पाबड़ा में हादसा हुआ था। इसमें दो मजदूरों की जान गई थी।
घटनास्थल पर बिखरा पड़ा मलबा
हादसे के बारे में मजदूरों से पूछताछ करती पुलिस
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2vHK2oe