कुछ दिन पहले ही मंडियों में धान वप कपास की आवक शुरू हो गई है। छह माह की मेहनत की फसल के भाव मंडी में बेशक पूरे नहीं मिल रहे हों, पर किसान इससे पहले अगली फसल (चुनाव) के मोलभाव समझने में लगे हैं। उचाना की मंडी में कपास बेचने आए कहसून के प्रेमचंद व काकड़ौद के किसान भरथू तै जब पूछा ताऊ तेरी कपास के भाव बिकी सै, तो बोला बेटा इसनै तो छोड़ अगली बात सुन! जै खट्टर आच्छै भाव देगा तो हाम भी उसने चुनाव में भाव दे दयांगै, नहीं तो चौटाला की तरिया यूं भी न्यू जाग्या छाएं छां। यात्रा के लिए सुबह 10 बजे जींद से शुरुआत के बाद बस से 25 किलोमीटर दूरी पर पहला हलका उचाना आया। यहां एक दुकान पर बैठा राजेंद्र शर्मा बोला- डूमरखां वाले की बहू को अबकी बार टिकट मिलेगी तो जीत के लिए काफी जोर लगाना पड़ेगा। दुष्यंत चौटाला भी फिर यहीं से तैयारी कर रहा है। फिर बस में चढ़ा तो 65 वर्षीय जयपाल हवलदार मिल गया। बोला बीएसएफ से रिटायर हूं। सोनीपत के गांव आहुलाना का रहने वाला हूं।
मौजूदा सरकार अब चुनाव के वक्त सड़क उखाड़ने और बनाने में लगी है। रही बात चौटाला परिवार की, उनका तो पूरा कुनबा ही बिखरा पड़ा है। अब अगर परकाश सिंह बादल कुछ मनमुटाव दूर करवा दंे तो कुछ बात बन सकती है। नहीं तो फिर सुपड़ा साफ हो जाएगा। हुड्डा और कांग्रेस का भी बयोंत मुश्किल ही लग रहा है। रही बात मोदी और खट्टर की, दोनों जनता का दिल जीत रहे हैं। अनुच्छेद 370 तो मोदी ने खत्म करके इतना बड़ा काम कर दिया। नरवाना पहुंचने से पहले सफाखेड़ी के पास बस के ड्राइवर ने एकदम ब्रेक मारे, पिछली सीट पर बैठा रामदिया बोला कै खट्टर का काफिला आगै आग्या। कंडक्टर बोला ताऊ इब तो खट्टर खट्टर नी सारै ऐ आग्गै आवैंगे। फिलहाल एक स्कूटी सवार रॉन्ग साइड आ गया था। नरवाना पहुंचते ही बस स्टैंड पर कालवन का सत्ता बोला-भाई नरवाना का इब के चुनाव सै, चुनाव तो जब होया करदा जब चौटाला और सुरजेवाला की टक्कर होया करदी।
रिजर्व सीट पर घणा कोय रोला कोन्या। नरवाना से कैथल वाली बस में बैठा तो परिचालक सीट पर बैठा रोडवेज कर्मचारी बोला अबकी बार सरकार का घमंड चुनाव में कर्मचारी निकालेंगे। इस पर बस में बैठी धनपति बोली- रे भाई कीमै कहलो- पुत के पांव तो पालनां में दिख ज्या सैं, मैंने तो न्यू लागै सै यू खट्टर फेर आवैगा। मेरा तो भतीजा बिना पीसां सिफारिश के लाग्या सै। कैथल की हनुमान वाटिका में आपस में चर्चा कर रहे लोगों में से जयदेव बोला- अबकी बार चुनाव कुछ अलग हो सकता है। एक नेता रातों में घर घर घूम रहा है। कैथल सीट पर ही मोदी और खट्टर की भी नजर है। पता नहीं वे किसे टिकट देंगे। फिर कैथल बस स्टैंड से चंडीगढ़ वाली बस में बैठा तो ज्यादातर कर्मचारी सवार मिले। अगली सीट पर बैठे रोडवेज कर्मी जयबीर व पब्लिक हेल्थ कर्मी वीरेंद्र के बीच बहस शुरू हो गई कि फिर खट्टर सरकार बनेगी।
इस पर रोडवेज कर्मी बोला, हम पर तो एस्मा लगा दिया था और अब चुनाव में तारे दिखाएंगे। सारे कर्मचारी एक हो रहे हैं। चालक बोला भाई आपस में बहस सही नहीं। इतनी देर में ही पेहवा आ गया। बस में से 6-7 महिला व कुछ पुरुष बस स्टैंड से पहले सरस्वती तीर्थ द्वार के सामने उतर लिए तो मैं भी उनके पीछे पीछे चल दिया। सरस्वती नदी किनारे पेहवा तीर्थ पर पिंडदान कर मंदिर से बाहर निकल रहा धनौरी का रामसिंह बोला-भाई मैं तो अपने पितृपक्ष के पिंड दान करवाकर आया हूं। पास में बैठा धर्मा बोला भाई इलेक्शन लड़ने वालों ने तो यहां भी पोस्टर लगवा दिए हैं। ऐसा लगा रहा कि जैसे मोदी ने विपक्षियों को किनारे लगा दिया है। खट्टर भी कइयां के पिंड भरवा देगा। इतने में पास खड़ी टीक की भतेरी बोली भाई मैं भी पितरां के पिंडदान करन आई हूं। हमने तो एक ही बात सुनी है कि जो ज्यादा मुंह उठाएगा, वो नीचे जरूर गिरेगा। इस तरह से ही कई सियासी परिवार आज हरियाणा में नीचे आ गए हैं। इसी दौरान पास खड़ा राजीव शास्त्री बोला- राजनीति का दीया उसका जलैगा, जिसमें बाती तेल हो। घणै तो आपणै घमंड में ढह ज्यांगे।
पहली बार इस दौर में खादर और बांगर की सियासत
बांगर और खादर की राजनीति पहली बार उस दौर में नजर आ रही है जिसमें कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने जैसे मुद्दे भी जगह बनाए हुए हैं। यहां के लोग कहते हैं चौटाला और कांग्रेस वाले तो अपने में ही उलझ कर रह गए। खट्टर की गाड़ी ठीक दौड़ती नजर आ रही है। लोगों की जुबान पर है कि म्हारे छौरे-छौरियां बिना पीसां और सिफारिश भर्ती हुए हैं।
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