सूर्य का यह राशि परिवर्तन आम जनमानस के लिए स्वास्थ्य रहने का पैगाम लेकर आता है। इसी के साथ ऋतु परिवर्तन का भी आगाज हो जाता है। सूर्य के उत्तरायण आने से ठंड भी धीरे-धीरे विदा होने लगती है और दिनों की गति भी बढ़ने लगती है। ज्योतिष्यिों का कहना है कि इस दिन किया गया दान पुण्य और अनुष्ठान अभीष्ठ फल देने वाला होता है। कौशिक के मुताबिक सनातन धर्म में मकर संक्रांति को मोक्ष की सीढ़ी बताया गया है। मान्यता है कि इसी तिथि पर भीष्म पितामह को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इसके साथ ही सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण हो जाते हैं। जिस कारण से खरमास समाप्त हो जाता है। प्रयाग में कल्पवास भी मकर संक्रांति से शुरू होता है। इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है। गंगा स्नान को मोक्ष का रास्ता माना जाता है। इसी कारण लोग इस तिथि पर गंगा स्नान के साथ दान करते हैं। मान्यता अनुसार सूर्य देव जब मकर राशि में आते हैं तो शनि की प्रिय वस्तुओं के दान से भक्तों पर सूर्य की कृपा बरसती है।
मेष : तिल-गुड़ का दान दें, उच्च पद की प्राप्ति होगी।
वृष : तिल डालकर अर्घ्य दें, बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी
मिथुन : जल में तिल, दूर्वा तथा पुष्प मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें, ऐश्वर्य प्राप्ति होगी
कर्क : चावल, मिश्री, तिल का दान, कलह, व्यवधानों पर विराम लगेगा।
सिंह : तिल, गुड़, गेहूं, सोने का दान, नई उपलब्धि होगी।
कन्या : पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य, शुभ समाचार मिलेगा।
तुला : सफेद चंदन, दुग्ध, चावल दान, शत्रु अनुकूल होंगे।
वृश्चिक : जल में कुमकुम, गुड़ का दान, विदेशी कार्यों से लाभ
धनु : जल में हल्दी, केसर, पीले पुष्प तथा तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दे, चारों ओर विजय
मकर : तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें अधिकार मिलेंगे
कुंभ : तेल, तिल का दान दें, विरोधी परास्त होंगे
मीन : हल्दी केसर, पीत पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें, सरसों, केसर का दान दें, यश बढ़ेगा
राशि के अनुसार करें दान-पुण्य
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