नई दिल्ली .आयुर्वेदिक औषधि कचनार का मानव शरीर पर असर जानने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्टडी करने जा रहा है। स्टडी झारखंड में कचनार का इस्तेमाल करने वाले लोगों पर होगी। शुक्रवार को एम्स, सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड व डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट, एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट चेज, झारखंड सरकार के बीच समझौता हुआ।
कचनार पर स्टडी झारखंड के जनजातीय एरिया विशेषकर हजारीबाग और कोडरमा में होनी तय हुई है। स्टडी का वक्त दो साल तय हुआ है, जोकि 4 साल तक हो सकती है। प्रोजेक्ट हेड करने वाले एम्स के प्रो. डॉ जीवन सिंह टिटियाल ने कहा कि कचनार का इस्तेमाल प्राचीन औषधि के तौर पर किया जाता है। कचनार का मानव शरीर पर कितना असर होता है यह जानने के लिए झारखंड में दो साल तक स्टडी होगी। दो तरह के लोगों को स्टडी में शामिल करेंगे। एक वह जो कचनार का इस्तेमाल ज्यादातर करते हैं और दूसरे वो जो इसका इस्तेमाल नहीं करते। इसके लिए कचनार की न्यूट्रीशियन वैल्यू के बारे में भी पता किया जाएगा।
आगे क्या: स्टडी पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट सरकार को दी जाएगी
स्टडी में शामिल डॉ. नंद कुमार ने कहा कि कहा जाता है कि कचनार के इस्तेमाल से लाइफ स्टाइल डिसीज (शुगर, ब्लड प्रेशर आदि) नहीं होतीं और स्वस्थ रहते हैं। आयुर्वेदिक के डॉक्टर इसका इस्तेमाल भी करते हैं। यही कितना सही है। यही पता लगाने के लिए स्टडी की जा रही है। स्टडी पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट सरकार को दी जाएगी।
कोयला या लकड़ी जलाकर खाना बनाने वालों पर भी स्टडी
कचनार पर स्टडी करने के साथ ही एम्स की टीम झारखंड में कोयला या लकड़ी जलाकर खाना बनाने वालों के स्वास्थ पर असर जानने के लिए भी स्टडी करेगी। इस स्टडी में भी दो तरह के लोग शामिल होंगे जो कोयला या लकड़ी जलाकर खाना बनाते हैं और दूसरे जो गैस का इस्तेमाल करते हैं। स्टडी में देखा जाएगा कि इनमें से कितनों को सांस और हार्ट की बीमारी है। ऐसे लोग जिनमें बीमारी पाई जाएगी एम्स के डॉक्टर उनका इलाज भी करेंगे।
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