योजना पर करीब 32 करोड़ रुपए की राशि खर्च का अनुमान है। बताया जाता है कि उक्त भूमि की मालिक नगरपरिषद विभाग नहीं है। इसके बावजूद अधिकारी अपना दावा ठोकने में लगे हैं। ऐसा होने से आने वाले समय में यह योजना खटाई में पड़ सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उक्त भूमि को गांव सामलात बतला रहे हैं। राजस्व रिकॉर्ड में भी भूमि का इंद्राज आबादी देह दर्ज है। जिसमें किसी भी विभाग की मिल्कियत नहीं दर्शाई गई है।
नगर परिषद विभाग के कार्यकारी अभियंता अजय पंगाल कहते हैं कि यह भूमि पर नगर परिषद की मलकियत है, जिसमें मल्टी लेवल पार्किंग, शॉपिंग मॉल व परिषद कार्यालय की योजना तैयार की गई है, जिसको मंजूरी के लिए उपायुक्त गुड़गांव के समक्ष भेज दिया गया है। सोहना एसडीएम डॉ. चिनार कहती हैं कि उन्होंने भूमि के दस्तावेजों का अवलोकन नहीं किया है। अगर भूमि नगर परिषद की मिल्कियत नहीं है तो निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता।
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