
जिस मनुष्य के हृदय में भगवान का वास है उस मानव को भगवान स्वयं पाप, पाखंड, रजोगुण व तमोगुण से हमेशा दूर रखते हैं। भगवान उन्हीं लोगों के हृदय में वास करते हैं जो सत्कर्म करते हुए नेक कमाई करते हैं। ये शब्द गांव टटियाणा स्थित मंदिर श्री ठाकुर द्वारा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के तीसरे दिन वेद व्यास पर विराजमान छवि राम दास ने श्रद्धालुओं से मुखातिब होते हुए कहे। स्वामी छवि राम दास ने कहा कि अनैतिक कार्यों से अर्जित किए गए धन पर पूरा परिवार मौज करता है। लेकिन किए गए कर्मों का फल केवल खुद को ही भुगतने पड़ते हैं। आज की कथा में स्वामी जी ने शिव विवाह, धु्रव चरित्र, वामन अवतार आदि कथाओं का संगीतमय वर्णन किया। शिव सती प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि किस तरह अपने पति शिव की आलोचना सुनने पर सती माता ने अपना शरीर यज्ञ कुंड में भस्म कर दिया तो नारायण के चक्र से सती की देह 51 स्थानों पर गिरा, जहां शक्तिपीठों की उत्पत्ति हुई। स्वामी ने कहा कि जीवात्मा का सच्चा संबंध सगे संबंधियों से नहीं बल्कि प्रभु से होना चाहिए। इस मौके पर दर्जनों महिलाएं व पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।
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