दहिया ने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों का ठीकरा विभाग के अधिकारियों के सिर फोड़ रही है। सरकार जल्दबाजी व आनन फानन में बेवजह अधिकारियों का निलंबन करके जनता में सस्ती लोकप्रियता पाने की नाकाम कोशिश कर रही है। सरकार जिस ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी की तारीफ करते नहीं थकती उसी ट्रांसफर पॉलिसी के तहत वर्ष 2016 में प्रताड़ित किए गए जेबीटी अध्यापकों की सुध आज तक नहीं ली। उन्होंने बताया कि लगभग तीन वर्ष पहले सरकार की गलत नीतियों एवं तुगलकी फरमानों के कारण कुछ विद्यालय में जरूरत से ज्यादा अध्यापक दे दिए तथा कुछ विद्यालय अध्यापक विहीन हो गए। जिन विद्यालय में अध्यापक नहीं है उन विद्यालय की ग्राम पंचायत जनप्रतिनिधियों के माध्यम से व स्वयं भी बार-बार अध्यापकों की व्यवस्था करने के लिए जिला प्रशासन से मिलती रही हैं। जिसकी वजह से छात्र हित में अधिकारियों के पास अध्यापकों की प्रतिनियुक्ति के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता, क्योंकि जेबीटी अध्यापकों का स्थानांतरण करने की सरकार की मंशा नहीं है। यदि समय रहते व स्थानांतरण नीति के अनुसार प्रतिवर्ष जून माह में स्थानांतरण किए जाते तो प्रतिनियुक्ति की नौबत ही नहीं आती। उन्होंने कहा कि सरकार खुद स्थानांतरण करने में विफल है तथा अपनी विफलता का ठीकरा उन अधिकारियों पर फोड़ रही है जिन्होंने व्यवस्था को बनाए रखने के लिए छात्र हित में विद्यालय को शिक्षक उपलब्ध करवाने के लिए अध्यापकों की प्रतिनियुक्तियां की है। छात्रहित की उन प्रतिनियुक्तियों के कारण जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी जयप्रकाश सभ्रवाल व प्राचार्य करण सिंह को निलंबित किया जाना गलत व निंदनीय है।
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