फरीदाबाद. पहले जब टेलीविजन नहीं था तो मनोरंजन के अलग-अलग साधन थे। इन्हीं में शामिल है राजस्थान की कावड़ हस्तकला, जो करीब 500 साल पुरानी है। लकड़ी के पोर्टेबल मंदिर के दरवाजों पर अलग-अलग रंगों से रामायण, महाभारत व अन्य पौराणिक कथाओं के पात्रों को उकेरा जाता था और फिर उनकी कहानियां गांव दर गांव गाकर सुनाई जाती थी। इस अद्धभुत कला की झलक फरीदाबाद में लगे सूरजकुंड मेले में देखी जा सकती है। जहां ब्रिटिश काउंसिल ने राजस्थान के जैसलमेर जिले के कलाकार कोजा राम को इस हस्तकला को प्रदर्शित करने का मौका दिया है।
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