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Friday, 21 February 2020

अहमदाबाद की फर्म ने कपड़ा खरीदने और जॉब वर्क करने के नाम पर ~55 लाख ठगे


सिटी के वर्धमान प्रिंट्स एसोसिएट्स के ऑथोराइज्ड सिग्नेटरी ने दी शिकायत

शहर की कपड़ा मार्केट स्थित वर्धमान प्रिंट्स एसोसिएट्स के ऑथोराइज्ड सिग्नेटरी के साथ लगभग 55 लाख की धोखाधड़ी का मामला सामने अाया है। धाेखाधड़ी का अाराेप अहमदाबाद की लीलेश्वर टेक्सटाइल फर्म पर लगा है। पुलिस ने 9 माह जांच के बाद एसोसिएट्स के पूर्णचंद शर्मा की शिकायत पर मामला दर्ज किया है।

पूर्णचंद शर्मा ने बताया कि उनकी फर्म कपड़े का काम करती है अाैर अहमदाबाद की लीलेश्वर टैक्सटाइल से कपड़ा प्रिंट कराती है। लीलेश्वर टेक्सटाइल उनके लिए अलग-अलग फर्म से ग्रे कपड़ा खरीदती है। उनकी दी हुई डिजाइनिंग के अनुसार प्रिंटिंग जॉब वर्क कराकर कपड़ा उनके पास भेजती है। प्रिंटिंग जॉब वर्क करने वाली फैक्टरी में अपना डिजाइन देते वक्त वह लीलेश्वर टेक्सटाइल के प्रोपराइटर मोडाराम व उसके पुत्र अनिल के साथ जाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि लीलेश्वर टेक्सटाइल को ग्रे कपड़ा देने वाली फर्म और प्रिंटिंग जाॅब वर्क की जो भी बिलिंग होती है, दोनों के ऊपर लीलेश्वर टेक्सटाइल को 5 प्रतिशत लाभ और ग्रे कपड़ा के आने पर किराया खर्चा और प्रिंटिंग के बाद पैकिंग का खर्च तय किया हुआ है।

ऐसे हुआ शक

पूर्णचंद ने शिकायत में बताया कि मार्च 2015 में लीलेश्वर टेक्सटाइल का बिल आया। जिसके साथ प्रदीप ओवरसीज फर्म की प्रिंटिंग जाॅब वर्क का बिल 24.50 रुपए प्रति मीटर के हिसाब से आया। साथ में ई-वे बिल भी था। वह मार्च 2019 में अहमदाबाद मोडाराम के पास हिसाब करने गए तो उनके बेटे अनिल ने ग्रे कपड़ा देने वाली तथा प्रिंट जाब करने वाली फर्मों के बिल दिखाए। मोडाराम ने बिल पर रेट 26 रुपए प्रति मीटर दिखाया था। उन्होंने अप्रैल 2010 में माल के बिल की काॅपी मोडाराम को भेजने के लिए कहा ताकि हिसाब का मिलान हो सके। जब उन्होंने मोडाराम से असल कापी मांगी तो उसने दिखाने से मना कर दिया। जब उन्होंने फोटोकापी बिलों को स्टडी किया तो किसी भी बिल पर ई-वे बिल नंबर नहीं था। बिलों पर ऑथोराइज्ड सिग्नेटरी के हस्ताक्षर भी अलग-अलग हैं। जब उन्होंने अपने स्तर पर हिसाब वेरिफाई किया तो आरोपियों ने कपड़े की खरीद और प्रिंट जाॅब बाबत अलग-अलग पार्टियों की लेजर से बिल मेल नहीं खाते थे।



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