सिटी के केपीएके महाविद्यालय की 98वीं वर्षगांठ पर वार्षिक खेल-महोत्सव हुआ। स्वतंत्रता सेनानी रहे लाला दुनीचंद अम्बालवी ने स्कूल के निर्माण के लिए जमीन दान दी थी। जब स्कूल के निर्माण करने का निर्णय लिया तो उनके दोस्त कृष्ण प्रसाद ने सबसे ज्यादा चंदा दिया। इस पर दुनीचंद ने इसी दोस्त के नाम पर स्कूल का नाम कृष्ण प्रसाद आर्य कन्या (केपीएके) महाविद्यालय रखा।
स्कूल के कार्य संचालन में दूनी चंद की प|ी कमला भी सहयोग करती थीं। कमला व दूनीचंद स्वतंत्रता संग्राम में बेहद सक्रिय रहें। गांधी के आहवान पर नमक कानून तोड़ने के लिए सत्याग्रह भी किया था। वे कई बार जेल भी गईं थी। उस समय कन्या शिक्षा को बढ़ावा उन्होंने दिया था। प्रिंसिपल रेखा गोयल बागी ने बताया कि 98 साल पहले 2 फरवरी को बसंत पंचमी के मौके पर स्कूल शुरू हुआ था। तब से अब तक 2 फरवरी को स्कूल की वर्षगांठ के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। 1971 में डीएवी मैनेजिंग कमेटी न्यू दिल्ली द्वारा इस स्कूल का संचालन अपने हाथ में लिया। 98वीं वर्षगांठ के मौके पर हुए कार्यक्रम में रोटरी क्लब सेंट्रल अम्बाला के सहायक गर्वनर वीके शर्मा ने दो कमरों की टाइल्स के लिए 18 हजार रुपए की धनराशि दी गई। साथ ही उन्होंने कहा कि रोटरी क्ल्ब इस स्कूल को अडॉप्ट कर काम करवाएगा।
भावुक हुए शर्मा बोले-बड़े ही सौभाग्य की बात है कि आज मैं उस स्कूल में मुख्यअतिथि बना हूं जहां मेरी बेटियाें और भतीजियों ने पढ़ाई कर अच्छे पद हासिल किए। बेटी शिवानी दुआ एमए, एमबीए, एमएड करने के बार माइंड ट्री स्कूल में टीचर है। अंकिता शर्मा हैदाराबाद में एक मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर है। भतीजी सुरुचि शर्मा करनाल में बीएड कॉलेज और स्कूल चला रही है। दूसरी भतीजी यशिका इटली में सेटल है।
मनसेव संस्था के प्रधान प्रेम गोंसाई, सदस्य मोहन गोयल, विनोद गुलाटी, सुनील जिंदल, दीपक खुराना, बीके ओबराय ने भी सहयोग दिया। इस सहायता के लिए विद्यालय के मैनेजर जेएस नैन व प्रिंसिपल रेखा गोयल ने धन्यवाद किया।
लाला धूनी चंद्र।
केपीएके महाविद्यालय की वर्षगांठ पर मौजूद अतिथि व स्टाफ।
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