गुरु कृपा से ही मनुष्य का परमेश्वर से मिलन संभव है, क्योंकि गुरु की महिमा अपरंपार है। भगवान शिव-पार्वती विवाह से मानव को अनेक संदेश दिए गए हैं। इनका अनुशरण करने से जीवन धन्य हो जाता है। मानव को तन पर गर्व नहीं करना चाहिए। शिव विवाह पूर्णतया प्रतीकात्मक है। ये बात साध्वी श्यामा भारती ने वेद व्यास भवन में दिव्य जाग्रति संस्थान की ओर से चल रही श्रीराम कथामृत के पहले दिन कही। कार्यक्रम का शुभारंभ श्याम सुदंर बतरा, सुनीता शर्मा, बलबीर सिंह भोगपुर, डॉ. बृजेश शर्मा, एडवोकेट रणधीर सिंह, डॉ. सुभाष, धर्मकोट सरपंच जोध सिंह, हुकुम चंद अरोड़ा, प्रवीन कुमार व सुरजीत सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। भावमय एवं संगीतबद्ध कथा का श्रद्धालुओं ने आनंद लिया। श्यामा भारती ने श्रीराम चरितमानस के बालकांड से भगवान शंकर एवं मां पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर ने विवाह के समय जो श्रृंगार किया, वह अद्भुत था। उन्होंने शीश की उलझी हुई जटाओं को ही संवार कर अपने जीवन का शृंगार बना लिया। सर्पों के आभूषण पहने, तन पर भस्म धारण की, नंदी को वाहन के रूप में अपनाया, त्रिशूल धारण किया। यह श्रृंगार मात्र अद्भुत ही नहीं रहस्यपूर्ण भी है। भगवान शंकर इस शृंगार के माध्यम से जीव मात्र को जीवन के सत्यों से अवगत करा देने चाहते हैं। भगवान शंकर की जटाओं को शृंगार का अंग बना लेने से अभिप्राय है कि जीवन की उलझनों में जब जीव प्रभु के चरणों में समर्पित हो जाता है तो यही उलझनें जीवन का शृंगार हो जाती हैं। सोने चांदी के स्थान पर सर्पों के आभूषण धारण करने से अभिप्राय है कि स्वर्ण की अशक्ति काल की भांति घातक है। भस्म धारण करते हैं तो समझाना चाहते हैं कि भस्मांतम शरीरज अर्थात यह तन एक दिन भस्म हो जाएगा। हे मानव इस तन पर गर्व न कर। इस देह के भीतर प्राणों के रहते इस जीवन के लक्ष्य से परिचित हो जाओ। कथा वाचक ने कहा कि शिव विवाह पूर्णतया प्रतीकात्मक है। कथा स्थल पर ब्रह्मज्ञान, कामधेनु गौ संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, अंतर कार्तीकारागार सुधार, अंतदिष्टि, आरोग्य बोध व दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा चलाए गए सामाजिक कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें ज्ञान दीक्षा, आयुर्वेद, आध्यात्मिक पुस्तकें व आयुर्वेद उत्पाद के स्टॉल भी लगाए गए। मौके पर प्रमोद वर्मा, जंगशेर सिंह, पुरुषोत्तम शर्मा, पवन गर्ग, मेम सिंह, रमेश गुर्जर, रामकुमार मौजूद रहे।
बिलासपुर|दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारंभ करते मुख्यातिथि व उपस्थित श्रद्धालु।
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