भगवान श्रीराम की तरह मर्यादा में रहकर जीवन जीना चाहिए। भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरषोतम कहा गया। उन्होंने अपने माता-पिता अाैर गुरुजनों की आज्ञा मानकर कार्य किया और हर कार्य में सफलता पाई। इसी सेवा के बलबूते पर श्रीराम ने अहंकार रूपी रावण का नाश करके विजय प्राप्त करने में सफलता पाई है। इसी तरह हमें भी माता-पिता व गुरु का अादेश मनाना चाहिए, सफलता जरूर मिलेगी।
ये उदगार अाचार्य शैलेंद्र पराशर ने व्यक्त किए। वह बीड़ बबरान धाम स्थित खाटू श्याम मंदिर के प्रांगण में चल रही भागवत कथा में श्रद्धालुओं काे संबाेधित कर रहे थे। इस दाैरान कृष्ण जन्म धूमधाम से मनाया गया। भजन गाए गए, टॉफियां व खिलौने बांटे गए। लोगों ने नाच-गाकर जन्म दिवस की खुशियां मनाई। श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए आचार्य शैलेन्द्र पराशर महाराज ने भगवान कृष्ण के जन्म की कथा को सुनाते हुए कहा कि बचपन में ही कृष्ण ने ऐसे-ऐसे खेल दिखाए, जिसने देखा वहीं हतप्रभ रह गया। कथा के अंत में वासुदेव टोकरे में कृष्ण को उठाकर जाते हुए की सजीव झांकी प्रस्तुत की गई। इस मौके पर आज मेरे अंगना घनश्याम पधारे, हाथी-घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की, कान्हा जन्म सुन आई-मैय्या दे दे बधाई आदि भजन गाए तो उपस्थित श्रद्धालु झूमने लगे। मंदिर के महंत प्रमोद शर्मा व मुख्य पुजारी विनोद शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया।
इस माैके पर समाजसेवी विनोद कुमार गोयल ने परिवार सहित भागवत का पूजन किया। मुख्यातिथि के ताैर पर एचएयू के रजिस्ट्रार बीआर कम्बोज थे। कथा में सीताराम सिंगल, शिवकुमार सिंगल, रामशरण सिंगल, जयदीप सिंधु, सुरेन्द्र लाहौरिया, सज्जन गुप्ता, अनुराग, अनुज शर्मा, भरत वर्मा, अरविंद शर्मा, महाबीर प्रसाद, सुरेश मैय्यड़ वाले आदि का भी सहयाेग रहा।
भागवत कथा के चौथे दिन अाचार्य शैलेंद्र पराशर ने श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया
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