कलियुग में हरिनाम संकीर्तन की प्रधानता है। भगवान के भक्तजन जहां मिलकर श्री हरिनाम संकीर्तन करते हैं, वहां भगवान अवश्य विराजमान रहते हैं। साेमवार काे वृंदावन से पधारे संत गोपीराम महाराज मां काली मंदिर धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा समारोह के समापन पर प्रवचन कर रहे थे। इससे पूर्व सुदर्शन परिवार की चेयरपर्सन कुसुमलता अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलित किया एवं राकेश बग्गा, मनोज जोली, दीपक गोयल, संदीप अरोड़ा, मोहित धीमान, मनीष अग्रवाल व पवन कुमार शर्मा ने पुष्प मालाएं पहनाकर संताें का स्वागत किया। संत गोपीराम ने कहा कि कलियुग में भगवत प्राप्ति का सरलतम व सर्वोत्तम साधन हरिनाम संकीर्तन है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण व भक्त सुदामा के चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि सुदामा का अर्थ है इंद्रियों का दमन करने वाला। उन्होंने कहा कि सुदामा उस संयमी जीव का प्रतीक है। जो परमात्मा को पाना चाहता है। उनके शुद्ध प्रेम को देखकर भगवान कृष्ण भी भूल गए कि वो द्वारिकाधीश हैं। वह भी सुदामा को मिलने के लिए नंगे पाव दौड़ पड़े। उन्होंने न केवल अपने आंसुओं से सुदामा के चरण धोए बल्कि उन्हें अपने आसान पर बैठाकर अपने जैसा वैभवशाली बना दिया। जहां दो सच्चे दिल मिलते हैं, वहीं सच्ची दोस्ती होती है। उन्होंने समझाया कि भगवान से भक्ति का संबंध स्थापित करना चाहिए क्योंकि भगवान को प्रेम भक्ति अति प्रिय है। संत गोपीराम ने सभी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि हमें सद्ग्रंथों में वर्णित सूत्रों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। स्वामी सच्चिदानंद गिरी महाराज ने कहा कि परमानंद की प्राप्ति के लिए सदगुरु से परमप्रेम अति आवश्यक है। समापन पर आप और हम सेवा मंडल ने दोनों संतों को पगड़ी पहनाकर व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। 7 दिवसीय भागवत कथा का समापन भंडारे से किया गया।
सिटी के काली मंदिर में प्रवचन सुनती महिलाएं व (इनसेट में) प्रवचन करते महाराज।
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