नवसंवत्सर का शुभारंभ 25 मार्च से होगा। पहले दिन रेवती नक्षत्र के साथ ही बुधवार होने से रहेगा ब्रह्म योग, जो मंगलकारी होगा। इसी दिन गुड़ी पड़वा के साथ शक्ति की साधना व उपासना के चैत्र नवरात्र शुरू हाेंगे। पहले दिन रेवती नक्षत्र व बुधवार होने से ब्रह्म योग रहेगा। इसके बाद पहले दिन से नवमी तक सर्वार्थ व अमृत सिद्धि व कई अन्य शुभ योग रहेंगे, जो न केवल मां की उपासना को विशेष फलदायी बनाएंगे, बल्कि शुभ कार्यों व खरीदी के लिए भी मंगलकारी और समृद्धिदायी रहेंगे। पंडितों का मत है कि नवरात्र का पहला दिन और अष्टमी व नवमी अक्षय तृतीया के समान होते हैं। यानी बिना मुहूर्त देखे शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
चैत्र नवरात्र का महत्व : मान्यताओं के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा का जन्म हुआ था और मां दुर्गा के कहने पर ही ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष प्रारंभ होता है। इसके अलावा भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्म भी चैत्र नवरात्रि में ही हुआ था।
संयोग... तिथि का क्षय नहीं, इसलिए इस बार पूरे नौ दिन के होंगे नवरात्र
पहला दिन : गुड़ी पड़वा होने से अबूझ मुहूर्त वाला होगा। इसी दिन कलश स्थापना होगी।
दूसरा दिन : सर्वार्थ-अमृत सिद्धि योग में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष फल मिलेगा।
तीसरा दिन : मां संतोषी व लक्ष्मी का अधिपत्य वाला दिन। इस दिन भी सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इसी दिन गणगौर तीज भी रहेगी।
चौथा दिन : भरणी नक्षत्र में विनायकी चतुर्दशी रहेगी। सिद्धि विनायक की पूजा करना अतिशुभ फलदायी रहेगा।
पांचवां दिन : कृतिका नक्षत्र के चलते रवि योग रहेगा। यह अमृत सिद्धि योग के समान शुभ फल देने वाला होता है।
छठवां दिन : सर्वार्थ-अमृत सिद्धि योग रहेंगे।
सातवां दिन : मृगशिरा नक्षत्र और मंगलवार का संयोग शुभ होगा। रात 11 बजे के बाद की गई पूजा-उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है।
आठवां दिन :सूर्योदय से दोपहर तक अार्द्रा इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा।
नवां दिन : सर्वार्थ सिद्धि योग सूर्योदय से प्रारंभ कर दोपहर 3:30 बजे तक रहेगा। इस दिन मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाएगी।
9 में से 6 दिन रवि, सर्वार्थ, अमृत सिद्धि जैसे योग बनाएंगे शक्ति की आराधना को फलदायी
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