गांव सीसवाल के ग्राम सचिवालय में शुक्रवार अलसुबह संदिग्ध हालात में आग लग गई। गांव के ग्राम सचिवालय में लगी आग ने कई सवालिया निशान खड़े किए हैं। सबसे पहला सवाल तो यही है कि सचिवालय में आग लगी या सरपंच-ग्राम सचिव के इशारे पर लगाई गई है। दूसरा यह कि आग लगने के कारण लोहे की अलमारी में रखा सरकारी रिकाॅर्ड तो जल गया जबकि कार्यालय में रखी प्लास्टिक एवं फोम-लेदर की कुर्सियां नहीं जलीं। इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच में सामने आने की उम्मीद है।
सुबह करीब 9 बजे चौकीदार महाबीर ने ग्राम सचिवालय में पंचायत के कमरे को खोला तो देखा कि कमरे के अंदर धुंआ उठ रहा है और आग लगी है। चौकीदार ने इसकी सूचना सरपंच घीसाराम व ग्रामीणों को दी। सरपंच ने इसकी सूचना आदमपुर फायर ब्रिगेड व पुलिस को दी। सूचना मिलते ही आदमपुर से दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। सरपंच ने इसकी लिखित शिकायत आदमपुर पुलिस को दी। सरपंच घीसाराम ने बताया कि सुबह साढ़े 4 बजे चौकीदार महाबीर ग्राम सचिवालय में बने दूसरे कमरे में गया था। करीब 9 बजे उसने पंचायत के कमरे का ताला खोला तो देखा कि अंदर आग लगी है। आदमपुर पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है।
सरपंच ने पुलिस को शिकायत दी, कहा- सुबह साढ़े चार बजे चौकीदार गया था दूसरे रूम में
कायम है बड़ा सवाल - आग लगी या लगाई गई ?
आज डीसी से मिलकर करेंगे शिकायत
लीलूराम का आरोप है कि पंचायत के कार्रवाई रजिस्टर में उसकी प|ी की जगह फर्जी हस्ताक्षर कर रखे हैं। लीलूराम ने बताया कि वे इस बारे में शनिवार को जिला उपायुक्त प्रियंका सोनी से मिलकर सरपंच व ग्राम सचिव के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
पंचायत सदस्य प्रतिनिधि ने मांग रखी है आरटीआई : गांव के सरपंच घीसाराम लुगरिया से पंचायत सदस्य एवं 1 पंचायत सदस्य प्रतिनिधि ने विकास कार्यों को लेकर आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांग रखी थी। सरपंच के खिलाफ आरटीआई लगाने वाले पंचायत सदस्य प्रतिनिधि लीलूराम मांझू ने बताया कि उसने विकास कार्यों व सरपंच से आय स्त्रोत को लेकर जानकारी मांगी थी। 2800 पेज की आरटीआई का जबाब देने के लिए लीलूराम से 5600 रुपये व 500 रुपये डाकघर का खर्च मांगा। जिस पर लीलूराम ने 6100 रुपये का खर्च अदा कर दिया, लेकिन आरटीआई के जबाब में उसे पुराने सरपंच के कार्यकाल के कागज व कुछ कागज डबल काॅपी कर भिजवा दिए गए।
सीसवाल के ग्राम सचिवालय में लगी आग को बुझाते दमकल कर्मी।
कार्यालय में रखी कुर्सियां व मेज जो आग लगने के बाद भी नहीं जली।
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