भास्कर न्यूज | फिरोजपुर झिरका. पाकिस्तान से पंजाबी समुदाय के जो लोग आजादी के वक्त हिंदुस्तान आए थे उनको एनपीआर से सबसे बड़ी दिक्कत होने वाली है। चाहे मुख्यमंत्री हों या गृह राज्य मंत्री यह भी इस दायरे में आते हैं क्योंकि उनके पूर्वज पाकिस्तान में पैदा हुए थे। जिनको कागजात दिखाने में मुसलमानों से ज्यादा दिक्कत हो सकती है। ये बातें पंजाब अकाल तख्त से जुड़े एवं पीस फाउंडेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार दया सिंह ने बातचीत के दौरान कही। सरदार दया सिंह बड़कली चौक पर चल रहे मेवात विकास सभा एवं मेवात आरटीआई मंच के धरना को 40वें दिन संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में सीएए-एनआरसी व एनपीआर को लेकर जो धरना प्रदर्शन चल रहे हैं उनकी गूंज संयुक्त राष्ट्र तक भी सुनाई देने लगी है। इसके अलावा दुनियाभर के मुस्लिम देशों ने हिंदुस्तान में मुसलमानों पर हो रही ज्यादती का विरोध करते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है। दया सिंह ने कहा कि पंजाब की सरकार ने भी एनपीआर नहीं लाने का फैसला किया है उन्होंने कहा कि सभी को आपस में मिलजुल कर रहना चाहिए। मुसलमानों को ज्यादा डरने घबराने की जरूरत नहीं है। उनके पूर्वज यहां सदियों से रहते आ रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने देश को आजाद कराने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था राजस्थान के अलवर जिले से एक यात्रा शुरू कर चुकी है जो अप्रैल माह में जलियांवाला बाग से लेकर करतारपुर कॉरिडोर तक जाएगी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से न केवल पंजाब सरकार के फैसले का समर्थन करेंगे बल्कि दोनों देशों की सरकार से अपील करेंगे कि आपसी भाईचारा बढ़ाने के लिए वीजा की शर्त समाप्त होनी चाहिए ताकि लोग बिना किसी झिझक और दिक्कत के दोनों देशों में आ जाकर आपसी भाईचारा बढ़ा सकें।
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