सिविल लाइन थाना पुलिस ने पुलिस लाइन एरिया में रहने वाले दिलबाग की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ उसकी बेटी को कानपुर के मेडिकल कॉलेज में सीट दिलवाने के नाम पर 10 लाख 36 हजार रुपये ठगने का केस दर्ज करवाया है।
शिकायत में दिलबाग ने बताया कि बेटी ने 2019 में 12वीं पास की थी। उसने नीट का एग्जाम दिया था। एआईक्यू की काउंसलिंग में अप्लाई किया था। पहली, दूसरी और एमओपी अप राउंड की काउंसलिंग में सिलेक्शन नहीं हुआ। 4 अगस्त 2019 की शाम को मेरे पास सुमित नामक व्यक्ति का फोन आया था। उसने कहा कि आप जिस तरीके से दाखिले का प्रयास कर रहे हो, उससे कोई फायदा नहीं होगा। मैं पेड सीट पे एडमिशन करवा दूंगा। उसने दाखिल देने की प्रार्थना हेतु एक पत्र ई-मेल पर भेजने के लिए कहा था।
यह पत्र स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव के नाम थी। इसके बाद उसने कहा कि आपके मोबाइल नंबर पर एक मैसेज आएगा जोकि मुझे बताना। 8 अगस्त 2019 को मोबाइल पर एक मैसेज आया था। इसमें बेटी की प्रार्थना को स्वीकृत करने बारे लिखा था।
मंत्रालय का एक फॉर्म आया था। उसने हमें सेक्टर 63 नोएडा स्थित ऑफिस पर आ जाओ। उसके कहने पर मैं, अपनी बेटी, दोस्त संजय व उसकी बेटी साक्षी के साथ नोएडा ऑफिस पर चले गए। वहां फॉर्म भरकर आ गए थे। फिर 2 सितंबर को उसका शाम को फोन आया था कि आपकी बेटी को कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज मिल गया है। आप 10 लाख रुपये लेकर आ जाओ। पेड सीट पर दाखिला करवा दूंगा।
3 सितंबर को पिता-पुत्री, दोस्त मनोज व सुरेंद्र को साथ लेकर कानपुर के लिए रवाना हुए थे। 4 सितंबर को 12 बजे कानपुर मेडिकल कॉलेज में पहुंचे। वहां सुमित ने मुझे मोहन नामक आदमी से मिलवाया था। फिर अनिल नामक आदमी कॉलेज का फॉर्म लेकर आया था। उसने मेरी बेटी से फॉर्म भरवा लिया था।
डायरेक्टर जनरल हेल्थ न्यू दिल्ली एमसीआई व स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय के दस्तावेज लगाए थे। तब उनके ऊपर यकीन कर लिया था। अनिल ने फीस जमा करवाने के नाम पर 36 हजार रुपये ले लिए। रसीद काटकर भी दी। कॉल लैटर आने की बात कही। सुमित और मोहन ने 5-5 लाख रुपये और लिए थे। इसके बाद एडमिशन का इंतजार रहा। एक-दो दिन बाद पता चला कि बेटी का एडमिशन नहीं हुआ। उसने उक्त लाखों रुपये ठग लिए।
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