(विवेक मिश्र)पीजीआईएमएस में कोरोना मरीजों को संक्रमण से उबारने के लिए प्लाज्मा थेरेपी प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में पहल की गई है। प्रशासन ने इस थेरेपी प्रक्रिया को शुरू करने के लिए आईसीएमआर को प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है।
इस प्रस्ताव में प्लाज्मा कलेक्ट करने और कोरोना संक्रमित मरीज पर ट्रायल करने के लिए निर्धारित मानक मॉडल ब्लड बैंक, थेरेपी के लिए ट्रायल सहित अन्य बिंदुओं का ब्योरा उपलब्ध कराया है। इस इस प्रस्ताव पर आईसीएमआर की अप्रूव्ल मिलती है तो हरियाणा में रोहतक पीजीआईएमएस एकमात्र ऐसा चिकित्सा संस्थान होगा, जहां प्लाज्मा थेरेपी शुरू हो सकेगी। एडवांस तैयारी करते हुए पीजीआईएमएस के अधिकारियों ने कोरोना संक्रमण से उबर चुके 180 मरीजों की लिस्ट तैयार कर ली है।
अब स्वस्थ होकर घर जा चुके मरीजों के साथ वर्तमान में पीजीआई में आने वाले संक्रमित मरीजों का ब्लड ग्रुप भी लिया जाएगा। वरिष्ठ चिकित्सक बताते हैं कि इस प्रक्रिया को अमल में लाने के लिए दो पूल तैयार किए जा रहे हैं, पहला जो मरीज रिकवर हो गए हैं और दूसरा वो मरीज जो प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं, उनके ब्लड ग्रुप को लेना अनिवार्य किया गया है। पीजीआई में अब तक 500 से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज आ चुके हैं जिनमें 180 के करीब मरीज संक्रमण से ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं।
अप्रूव्ल के बाद ही पीजीआई में एकत्रित करेंगे ठीक हो चुके मरीजों का प्लाज्मा
आईसीएमआर से मंजूरी मिलते ही स्वस्थ हो चुके लोगों को आगे आकर प्लाज्मा डाेनेट करने के लिए मोटिवेट किया जाएगा। चिकित्सक बताते हैं कि जब तक सरकार और आईसीएमआर से इस थेरेपी के ट्रायल की अनुमति नहीं मिल जाती तब तक पीजीआई में प्लाज्मा एकत्रित नहीं किया जा सकता है।
संक्रमित मरीज जिस अस्पताल में भर्ती है, सिर्फ वहीं पर प्लाज्मा कलेक्ट किया जा सकता है। क्योंकि इसमें वेरीफिकेशन होता है। प्लाज्मा के लिए वालेंटरी डोनेशन लिया जाए या नहीं, इस पर अभी अंतिम फैसला लिया जाना है।
प्लाज्मा थेरेपी की प्रक्रिया को यूं समझें : सीधे तौर पर प्लाज्मा थेरेपी प्रक्रिया में एंटीबॉडी मुख्य होती है। किसी खास वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी तभी बनता है, जब व्यक्ति उससे ग्रस्त होता है। कोरोना वायरस से जो व्यक्ति पीड़ित होकर स्वस्थ हुआ है तो उसकी बॉडी में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनना शुरू हो जाता है। इसी एंटीबॉडी के दम पर मरीज कोरोना संक्रमण से उबर पाता है।
संक्रमित व्यक्ति बीमार रहता है तो उसमें वायरस के खिलाफ फौरन एंटीबाॅडी नहीं बन पाती जिसकी वजह से मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। ऐसे में जो मरीज स्वस्थ हो चुका होता है, उसके शरीर से एंटीबॉडी निकालकर दूसरे गंभीर रूप से संक्रमित मरीज में ट्रांसफर किया जाता है। जैसे ही एंटीबॉडी प्रभाव दिखाना शुरू करता है वायरस की ताकत कमजोर पड़ने लगती है और इससे मरीज की हालत में सुधार होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
संक्रमण से उबर चुके मरीज प्लाज्मा देने के लिए आएं आगे
मॉडल ब्लड बैंक के चिकित्सक बताते हैं कि कोरोना संक्रमण से उबर चुके लोगों को प्लाज्मा देने के लिए बिना डरे आगे आएं। संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने के बाद फैले भ्रम को दूर करते हुए बताया कि डेंगू से पीड़ित मरीज में जिस तरह प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती है। ठीक उसी तरह प्लाज्मा कलेक्ट किया जाएगा। प्लाज्मा लिया जाना ब्लड डोनेशन जैसा नहीं है। यदि कोरोना का शिकार होने के बाद स्वस्थ हो चुके व्यक्ति चाहे तो 10 दिन बाद दोबारा प्लाज्मा डोनेट कर सकता है।
वायरस के दूसरे स्टेज पर प्लाज्मा दिया जाना कारगर
पीजीआई में संचालित कोविड-19 कंट्रोल रूम के प्रभारी व कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वरुण अरोड़ा बताते हैं कि कोरोना वायरस के तीन चरण होते हैं। पहले चरण में वायरस व्यक्ति के शरीर में जाता है। दूसरी स्टेज में वायरस फेफड़ों में पहुंचता है और तीसरे स्टेज पर संक्रमित व्यक्ति का शरीर इससे लड़ने और इसे मारने की कोशिश करता है जो सबसे घातक स्टेज होती है।
इस स्टेज में व्यक्ति की बॉडी के अंग तक खराब होने की नौबत आ जाती है। उन्होंने बताया कि अभी तक जो देखने में मिला है कि प्लाज्मा थेरेपी देने के लिए वायरस की दूसरी स्टेज कारगर होती है।
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