धान की फसल को वैकल्पिक फसलों जैसे मक्का, कपास, बाजरा, दलहन, सब्जियों व फल द्वारा विविधिकरण करने के लिए राज्य सरकार की ओर से मेरा पानी, मेरी विरासत योजना चलाई जा रही है। डिप्टी डायरेक्टर कृषि डॉ. जसविंदर सैनी ने बताया कि भूमिगत जल का स्तर निरंतर घटने के मध्यनजर इस योजना के अंतर्गत राज्य के सभी धान वाले जिले शामिल किए गए हैं। किसान अपने पिछले बिजाई किए गए धान के क्षेत्र को वैकल्पिक फसलों जैसे मक्का, कपास, बाजरा, दलहन, सब्जियों व फल में बदल सकता है।
इस योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को सरकार द्वारा 7 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। जिसमें फसल की बिजाई पर 2 हजार रुपए तथा फसल कटाई उपरांत 5 हजार रुपए किसानों के खाते में डाली जाएगी। जिला रेवाड़ी में इस योजना के तहत अभी तक 551 किसानों ने कपास के लिए तथा 1509 किसानों ने बाजरा के पंजीकरण करवाया है। जिनका सत्यापन कृषि एवं राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
कपास के लिए कुल 467.7 हेक्टेयर क्षेत्र का पंजीकरण हुआ है और इस योजना की शर्तों के अनुसार 82 किसानों योग्य पात्र पाए गए हैं। इसी तरह बाजरा फसल के लिए 1473.72 हेक्टेयर क्षेत्र का पंजीकरण हुआ है। जिसका सत्यापन का कार्य चल रहा है। इसलिए किसानों से अनुरोध है कि इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं तथा पानी की बचत में सरकार का पूर्ण सहयोग करें। इसके साथ ही खरीफ मौसम में बिजाई की गई फसलों का पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अवश्य लगाएं, ताकि उनको फसल बेचने में किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
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