राष्ट्रीय मत्स्य अनुवांशिक संसाधन ब्यूराे के वैज्ञानिकाें और सहयाेगी संस्थाओं ने देशभर की मछलियाें में हाेने वाले पांच और झिंगाें में दाे और नए राेगाें का पता लगाया है।
इसके साथ ही ब्यूराे के वैज्ञानिकाें ने इन राेगाें के निदान के लिए सभी पहलुओं पर शाेध कार्य शुरू कर दिया है। रिसर्च के साथ दवाई के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। नए राेगाें की रिपाेर्ट मत्स्य पालन और विभाग के अन्य अधिकारियाें काे भी भेजी गई है। हाल ही में राष्ट्रीय मत्स्य अनुवांशिक संसाधन ब्यूराे लखनऊ के निदेशक डाॅ. कुलदीप के लाल और प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. सुलिप कुमार माझी और उनकी टीम के सदस्य हिसार के डाबड़ा गांव के फिश फार्म संचालक अजय वीर सिंह और उनके बेटे अर्जुन सिंह के यहां पहुंचे थे।
भास्कर से विशेष बातचीत के दाैरान निदेशक डॉ. कुलदीप के लाल और राष्ट्रीय मत्स्य अनुवांशिक संसाधन ब्यूराे लखनऊ के प्रधान वैज्ञानिक व सर्विलांस प्राेग्राम के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर डाॅ. नीरज सूद ने बताया कि सर्विलांस प्राेग्राम के तहत मछलियाें में हाेने वाली बीमारियाें का पता लगाया जाता है।
जांच और सुझाव है मुख्य उद्देश्य
मछली सर्विलांस प्राेग्राम के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर डाॅ. नीरज कुमार सूद का कहना है कि सर्विलांस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मछलियाें में हाे रही बीमारियाें की जांच करना और मत्स्य पालकाें काे उनके प्रबंधन के बारे में सुझाव देना है।
इन राज्यों में चलाया जा रहा सर्विलांस कार्यक्रम
राष्ट्रीय मत्स्य अनुवांशिक संसाधन ब्यूराे लखनऊ के प्रधान वैज्ञानिक व सर्विलांस प्राेग्राम के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर डाॅ. नीरज सूद ने बताया कि वर्तमान में सर्विलांस यानि निगरानी कार्यक्रम हरियाणा के अलावा यूपी, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, वेस्ट बंगाल, महाराष्ट्र, केरला, कर्नाटक, गुजरात, असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड समेत 19 राज्य और 3 केंद्रीय शासित प्रदेशाें जिनमें अंडमान निकाेबार, आइलैंड शामिल है। इस परियाेजना की वित्तीय सहायता राष्ट्रीय सांख्यिकी विकास बाेर्ड द्वारा की जा रही है।
उपमहानिदेशक डाॅ. जेके जेना कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक और निदेशक कुलदीप के लाल सह समन्वयक है। देशभर में कार्यक्रम काे चलवाने में डेयरी मंत्रालय, फिशरिज काॅलेज के अलावा 31 संस्थाएं सहयाेग कर रही हैं। बताया कि यदि हम मत्स्य पालन में बीमारियाें पर नियंत्रण कर पाएं ताे मछली पालकाें की आय दाेगुना करने में भी काफी मदद मिलेगी। किसी भी नए राेग के बाद इसकी सूचना मत्स्य विभाग भारत सरकार काे भेजी जाती है। बताया जाता है कि बीमारी राेकथाम के लिए क्या कदम उठाने चाहिए।
राष्ट्रीय मत्स्य अनुवांशिक संसाधन ब्यूराे लखनऊ के प्रधान वैज्ञानिक व सर्विलांस प्राेग्राम के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर डाॅ. नीरज सूद ने बताया कि वर्तमान में सर्विलांस यानि निगरानी कार्यक्रम हरियाणा के अलावा यूपी, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, वेस्ट बंगाल, महाराष्ट्र, केरला, कर्नाटक, गुजरात, असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड समेत 19 राज्य और 3 केंद्रीय शासित प्रदेशाें जिनमें अंडमान निकाेबार, आइलैंड शामिल है। इस परियाेजना की वित्तीय सहायता राष्ट्रीय सांख्यिकी विकास बाेर्ड द्वारा की जा रही है।
उपमहानिदेशक डाॅ. जेके जेना कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक और निदेशक कुलदीप के लाल सह समन्वयक है। देशभर में कार्यक्रम काे चलवाने में डेयरी मंत्रालय, फिशरिज काॅलेज के अलावा 31 संस्थाएं सहयाेग कर रही हैं। बताया कि यदि हम मत्स्य पालन में बीमारियाें पर नियंत्रण कर पाएं ताे मछली पालकाें की आय दाेगुना करने में भी काफी मदद मिलेगी। किसी भी नए राेग के बाद इसकी सूचना मत्स्य विभाग भारत सरकार काे भेजी जाती है। बताया जाता है कि बीमारी राेकथाम के लिए क्या कदम उठाने चाहिए। झिंगाें में इन दाे बीमारियाें का लगाया पता: हिपेताेपेन्कि्रयाटिक माइक्राेस्पेरिडिमाेसिस और इन्फैक्शियस मयाेनेक्राेसिस।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/39HMZ7B