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Sunday, 27 September 2020

टेस्ट के 1600 रु. लेने लगे तो कम हुई सैंपलिंग, 19 दिन में 2788 केस मिले थे, आखिरी 8 दिन में 546 ही आए

प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पताल में कोरोना जांच के पैसे लेने क्या शुरू किए, सैंपलिंग भी कम हो गई और कोरोना के केस भी। हालत यह है कि जहां पहले सिविल अस्पताल में 100-150 लोगों की लंबी लाइन लगती थी, अब 8-10 लोग ही खड़े नजर आते हैं। सैंपलिंग के पैसे लगने लगे तो कोरोना के केस भी कम आने लगे। पहले कहां 190 केस आते थे, जो अब 43 के आसपास रह गए हैं।

यह सुखद स्थिति नहीं है कि कोरोना कम हो गया। असल में जांच नहीं हो रही। सरकार ने 19 सितंबर से यह नियम लागू कर दिया कि बिना डॉक्टर की पर्ची पर कोरोना टेस्ट कराने के 250 से 1600 रुपए तक लगेंगे। लेकिन नए नियम से जरूरतमंदों की परेशानी बढ़ गई। क्योंकि निजी अस्पतालों में भी डॉक्टर आसानी से कहां देखते हैं। देखते भी हैं तो सिर्फ यह कह देते हैं कि कोरोना रिपोर्ट लेकर आओ।

पहले लक्षण दिखने पर भी मुफ्त जांच होती थी

पहले किसी भी व्यक्ति काे हल्का बुखार, खांसी व सांस लेने में तकलीफ या किसी भी वस्तु की दुर्गंध नहीं आने पर टेस्ट कराने के लिए अस्पताल पहुंच जाते थे। टेस्ट कराने से पहले किसी डाॅक्टर से सलाह भी नहीं लेते थे कि उन्हें टेस्ट कराना चाहिए या नहीं।

अब बिना डॉक्टर की पर्ची के पैसे लगेंगे

सरकार ने 19 सितंबर से नियम लागू कर दिया कि डॉक्टर की पर्ची के बिना सरकारी अस्पताल में भी जांच कराने पर 1600 रुपए तक लगेंगे। यह नियम इसलिए बनाया कि दूसरे राज्य जाने वाले या दूसरी जगह से आने वाले को किसी ऑफिस में अगर कोरोना रिपोर्ट लाने को कहा जा रहा है तो ऐसे लोगों से जांच के बदले पैसे लिए जाएं।

नोटिस बोर्ड लगाए स्वास्थ्य विभाग तो मिल सकती है राहत

सरकार ने नियम तो बना दिया, लेकिन इसका कोई क्रैटेरिया नहीं बनाया कि असली जरूरतमंदों की जांच फ्री में हो। निजी डॉक्टर भी आसानी से कहां देखते हैं। सरकारी अस्पतालों में भी लंबे इंतजार के बाद लोगों का नंबर लगता है। इसलिए, कोई ऐसी व्यवस्था बनाए कि जरूरतमंदों की फ्री में बिना झमेले के जांच हो।

विभाग को लोगों को खुद करना होगा जागरूक

सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग जांच केंद्र के बाहर नोटिस बोर्ड लगाकर लोगों को जागरूक करे तो भी जांच कराने वालों की परेशानी कम हो सकती है। अभी तो अधिकांश लोगों को जानकारी ही नहीं है।

20 से 27 सितंबर तक के बीच एकदम से कम हो गई सैंपलिंग की गति

अब राेजाना औसतन 650 सैंपल हाे रहे हैं, जबकि 1 से 19 सितंबर तक 22450 सैंपल हुए यानी राेजाना औसतन 1181। इन 19 दिनाें में राेजाना 146 की औसत से 2788 पाॅजिटिव मिले। अब 20 से 27 सितंबर के दिनाें में सैंपलिंग घटने से केस भी घटकर राेजाना की 68 की औसत से 546 मिले।



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अब केवल 4 से 5 लोग ही लाइन में दिखते हैं।


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