लाल डोरा खत्म करने को लेकर चयनित गांव गढ़ी पाडला के ग्रामीणों को बीडीपीओ कार्यालय में बुलाया गया था। इस दौरान गांव की महिला मूर्ति का आरोप है कि गांव में उनका 200 गज का प्लॉट है और उसकी रजिस्ट्री सरपंच प्रतिनिधि के साथ मिलकर देवर के बेटे ने अपने नाम करवा ली है। उसके बड़े बेटे राजीव ने दो सितंबर को सरपंच और डीडीपीओ को ग्रामीणों द्वारा सूचना के बाद प्लॉट को लेकर लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उसके बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
2009 में उन्होंने प्लॉट को 45 हजार में चाचा के लड़के नवीन को बेचा था, लेकिन सात हजार रुपए देने के बाद बाकी राशि दो महीने के अंदर देने की बात हुई थी। उसके बाद रुपए नहीं दिए और मंगाने पर धमकी देने लगा। अब उन्हें पता भी नहीं था कि नवीन के सरपंच प्रतिनिधि के साथ मिलकर सारे कागजात अपने नाम तैयार करवा लिए। शुक्रवार को हुई ग्राम सभा के बारे में भी उन्हें जानकारी नहीं दी गई और सभी दावे व आपत्तियों को अधिकारियों के साथ मिलकर निपटा दिया। वहीं विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि सभी दावे व आपत्तियों को लेकर नियमानुसार काम किया गया है और पर्याप्त समय दिया गया था।
सैकड़ों ग्रामीणों को बुलाया, इंतजाम शून्य
गांव गढ़ी पाडला के ग्रामीणों को मुनादी करवाकर बीडीपीओ कार्यालय में सुबह 9:30 बजे पहुंचने के लिए कहा गया था, लेकिन जब ग्रामीण पहुंचें तो विभाग के कर्मचारियों की कोई तैयारी नहीं थी। दोपहर तक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो पाई और शाम पांच बजे तक 183 में से सिर्फ 40 ग्रामीणों का रजिस्ट्रेशन हो सका। इसके अलावा कोई भी इंतजाम नहीं था। यहां तक कि पीने की पानी की सुविधा भी ग्रामीणों के लिए नहीं की गई थी।
दो अक्टूबर को दी जानी हैं 11 गांवों के ग्रामीणों को रजिस्ट्रियां
गढ़ी पाडला समेत जिले के 11 गांवों में लाल डोरा खत्म करने और ग्रामीणों को मकानों के रजिस्ट्री नंबर देने का कार्य अंतिम चरण में है। दो अक्टूबर को ग्रामीणों को रजिस्ट्री नंबर दिए जाएंगे। सबसे पहले निशानदेही, फिर ड्रोन मैपिंग, मैप बनाया जाता है, सर्वे ऑफ इंडिया टीम द्वारा दी गई लिस्ट के अनुसार प्रोपर्टी आइडी दी जाती है और उसके बाद दावे व आपत्तियां ली जाती हैं। दावे आपत्तियां क्लियर होने के बाद अंतिम चरण में रजिस्ट्रेशन कर ग्रामीणों को मात्र 10 रुपए के स्टांप पेपर के बाद रजिस्ट्री दे दी जाएगी।
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