महिलाओं को राजनीति में आने के लिए राजनैतिक दलों द्वारा 33 प्रतिशत आरक्षण देने की पैरवी की जाती है। संसद में भी इस मुद्दे पर लंबी बहस होती है। ग्रामीण क्षेत्र बरोदा हलके से किसी भी प्रत्याशी को जीताकर विधानसभा में भेजने में महिला मतदाता अहम भूमिका निभाती है, लेकिन प्रमुख दलों द्वारा महिला को विधानसभा में पहुंचाकर हलके की आवाज उठाने का अवसर नहीं दिया है।
गौरतलब है कि पंजाब से अलग होकर हरियाणा वर्ष 1966 में अस्तित्व में आया था। उसके बाद 13 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनेलो, कांग्रेस, भाजपा आदि प्रमुख दलों ने महिला को प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारने का जोखिम नहीं उठाया है। हर बार दलों द्वारा पुरुष प्रत्याशी को ही चुनावी मैदान में उतारा गया। बरोदा हलका वर्ष 2005 तक बरोदा हलका एससी वर्ग के लिए आरक्षित था। 2009 में सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था।
महिलाओं को आगे आने में राजनैतिक दल नहीं गंभीर : संतोष दहिया
सर्वखाप और दहिया खाप की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष संतोष दहिया का कहना है कि महिलाओं को आगे लाने में दल गंभीर नहीं हैं। उनको भीड़ तक सीमित रखते हैं निर्णायक भूमिका में देने में पीछे हट जाते हैं। यही कारण है कि महिलाओं को संसद में प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत तक रहता है। संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही जाती है, लेकिन दिया नहीं जाता। खाप की महिला विंग पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग उठा रही है।ताकि इसके बाद विसऔर लोकसभा में महिलाओं को आरक्षण दिलाया जा सके। जिससे महिलाएं भीड़ का हिस्सा न बनकर निर्णायक भूमिका में आ सके।
हलका में है 80429 महिला मतदाता
बरोदा हलका में 54 गांव हैं। हलके में कुछ मतदाता करीब 178250 हैं। इनमें से महिला मतदाताओं की संख्या करीब 80429 हैं। जो करीब 45 प्रतिशत से अधिक हैं। वहीं हलके में इस बार बूथों की संख्या बढ़ाकर 280 हो गई हैं। हलके में एक महिला बूथ बनाया जाएगा। जहां पर महिला स्टॉफ ही नियुक्त किया जाएगा।
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