नगर निगम की टीम ने शहर के मॉडल टाउन के साथ लगती दयानंद कॉलोनी में करोड़ों की जमीन से अवैध कब्जे हटाए। लाख से सवा लाख रुपए प्रति गज कीमत की इस जमीन पर लोगों ने कुछ शोरूम भी बन रखे थे। मौके पर कुछ लोगों ने जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल दिखाने की कोशिश की, लेकिन उनके कब्जे भी तोड़ दिए गए। लोगों ने विरोध किया, लेकिन भारी पुलिस बल के चलते पीछे हट गए।
अब लोग कोर्ट जाने की धमकी दी। दो लोगों ने स्टे लिया था, जिनकी जमीन को छोड़ दिया है। डेढ़ घंटे चली कार्रवाई में करीब 2600 वर्ग गज यानी 27 करोड़ से ज्यादा कीमत की जमीन को कब्जा मुक्त करवाया। कार्रवाई के दौरान दोनों ओर से सड़क पर वाहनों की आवाजाही भी बंद कर दी थी। खाली कराने के बाद जमीन पर खंभे गाड़ कर तारबंदी भी कर दी। सिविल लाइन इंचार्ज विजय पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। तहसीलदार राज बक्श को ड्यूटी मजिस्ट्रेट बनाया गया था।
महंगी जमीन पर भू माफिया की नजर
जमीन प्राइम लोकेशन पर है, जमीनों का रेट यहां पर एक लाख रुपए से डेढ़ लाख रुपए प्रति गज है। शहर के भू-माफिया की नजर भी इस जमीन पर है। यहां पर लोगों ने शोरूम बनाने के लिए प्लाटों की नींव भरी थी। शोरूम बनाने की तैयारी भी चल रही थी।
लोग बोले: हमारे पास 1985 से जमीन की रजिस्ट्री व इंतकाल है, निगम जबरदस्ती कब्जा कर रहा है
डॉ. सुभाष चंद्र सिंगल ने कहा कि नगर निगम ने हमारी जमीन पर जबरदस्ती कब्जा किया है। मेरे पास 1985 से जमीन की रजिस्ट्री व इंतकाल है। अवैध कब्जे नहीं हटाए जा रहे हैं। जिनके पास इंतकाल और रजिस्ट्री है, उनकी जमीन छुड़वाई जा रही है। रजिस्ट्री अधिकारियों को दिखाने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उनके कागज नहीं देखे।
राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि मेरे पास इस जमीन का 1982 से मालिकाना हक है, हमें ना तो निगम ने कोई नोटिस दिया। बगैर सूचना दिए ही हमारी जमीन की दीवार गिरा दी। नियम के अनुसार पहले नोटिस देना होता है, इसके बाद जमीन से कब्जा हटा सकते हैं। निगम ने बिल्कुल गलत कार्रवाई की है। निगम के खिलाफ जमीन के सभी मालिक कोर्ट में जाएंगे।
अधिकारी बोले- जमीन निगम की है, लोगों ने किया कब्जा
निगम के संयुक्त आयुक्त गगनदीप सिंह ने बताया कि मॉडल टाऊन स्थित ग्रेस होटल के पास मौजूद शामलात देह पर कुछ ने अवैध कब्जा कर रखा था। जानकारी पर निगम नोटिस जारी किए थे। लोग निगम में आयुक्त के समक्ष पेश हुए और अपना पक्ष रखा। सरकारी जमीन होने के पुख्ता सुबूत होने पर उनकी अपील खारिज कर दी गई। दो लोगों ने हाईकोर्ट से स्टे लिया है, जिनकी जमीन पर कार्रवाई नहीं की गई। 2600 वर्ग गज पर अवैध निर्माण को गिराकर तार बंदी की गई है।
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