करनाल में आवारा कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू हो गया है। इससे अगले कुछ महीनों में कुत्तों की संख्या में इजाफा नहीं होगा। खास बात यह है कि जिस एनजीओ को निगम की ओर से नसबंदी का ठेका दिया गया है, वह नसबंदी के साथ-साथ प्रत्येक डॉग को रैबीज का टीका लगाकर वैक्सीनेटेड भी कर रहा है। इसका फायदा यह होगा कि यदि कुत्ता काट भी ले तो उससे होने वाले नुकसान का भय नहीं रहेगा।
निगम कमिश्नर विक्रम ने बताया कि इस कार्य के लिए रांवर रोड पर संस्था ने एक जगह किराए पर ली है। कई दिन पहले संस्था के लोगों ने करनाल आकर अपनी तैयारी शुरू की दी थी। पहले ट्रायल किया और अब दो दिन से नसबंदी का काम जारी है। संस्था के वेटरनरी सर्जन डॉ. विजय सिंह गुर्जर, मेल और फीमेल दोनों की नसबंदी कर रहे हैं।
ऑपरेशन के बाद प्रत्येक कुत्ते को रैबीज का टीका लगा देते हैं, ताकि भविष्य में वह किसी व्यक्ति को काटे तो नुकसान नहीं। नसबंदी का सारा कार्य एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के स्टैंडर्ड नॉर्म के अनुसार ही किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नसबंदी करने वाली संस्था के साथ नगर निगम का एक साल का करार हुआ है। यह कार्य इससे कम अवधि में भी हो सकता है।
नगर निगम कमिश्नर विक्रम ने शहर के तमाम नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि काफी कोशिशों के बाद नगर निगम की ओर से कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू करवाया गया है, क्योंकि शहर में आए दिन कुत्तों के आतंक और उनके काटने की घटनाओं से गली-मोहल्लों में दहशत रहती थी, अब इससे निजात मिलेगी। उन्होंने कहा कि गली-मोहल्लों में नागरिक, संस्था की टीम के सदस्यों का कुत्ते पकड़ने के दौरान विरोध न करें, बल्कि सहयोग करें, तभी काम चलेगा।
सुबह 6 से 10 बजे तक का रखा गया है कुत्तों को पकड़ने का समय
संस्था के सचिव अभय तेवतिया ने बताया कि शहर के किसी न किसी हिस्से में जाकर टीम 20-25 कुत्ते एक दिन में पकड़ती है। पकड़ने का समय सुबह 6 से 10 बजे तक का रखा गया है। इनको पकड़ने के लिए बटरफ्लाई नेट का प्रयोग किया जाता है। पकड़ने के बाद उसे बंधीकरण सेंटर ले जाकर रखा जाता है, जहां उसकी देखभाल और खाना दोनों होते हैं। खाने में दलिया, सोयाबीन, चावल और अंडे कुत्तों के आहार में शामिल किए जाते हैं। शुरू में कुत्ते को फास्ट पर रखते हैं, फिर नसबंदी करते हैं।
सारी प्रक्रिया 3 दिन में निपट जाती है। एक ऑपरेशन में 10 से 15 मिनट ही लगते हैं और प्रतिदिन 15 से 20 सफल ऑपरेशन नसबंदी के हो जाते हैं। ऑपरेशन के बाद कुत्ते को अपनी देखरेख में रखते हैं। सारा काम सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होता है। दो डॉक्टर इस काम के लिए रखे हैं। दूसरी और करनाल के 3 वेटरनरी डॉक्टरों की टीम सुपरविजन के लिए लगाई गई है। प्रत्येक कुत्ते का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। नसबंदी के बाद उसकी पहचान के लिए उसके बाएं कान पर मार्क लगा दिया जाता है, ताकि उसे दोबारा नसबंदी के लिए न पकड़ा जाए। जिस एरिया से कुत्ता उठाते हैं, उसे वहीं छोड़ देते हैं। पिछले दो दिन में करीब 50 कुत्ते अलग-अलग जगहों से पकड़े हैं।
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