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Sunday, 8 November 2020

नगर निगम चुनाव की घोषणा से पहले ही अमीषा चावला को मेयर प्रत्याशी बनाया

सिटी नगर निगम के चुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है लेकिन पूर्व मंत्री चौधरी निर्मल सिंह ने रविवार को अमीषा चावला को हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट की ओर से मेयर प्रत्याशी घोषित कर दिया। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का टिकट न मिलने पर बागी हुए निर्मल ने 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद यह फ्रंट बनाया था। वर्ष 2000-05 में नगर परिषद में पार्षद रहीं अमीषा 10वीं पास हैं। पूर्व पार्षद पति दिलीप चावला बिट्टू भूपेंद्र हुड्डा सरकार में सीएम के मीडिया कोऑर्डिनेटर रहे हैं। बिट्टू 2005 में नगर परिषद और 2013 में निगम पार्षद रह चुके हैं।

अमीषा के हिस्से आए ‘टिकट लड्‌डू’ की 2 वजह

पंजाबी रिलेशनः सिटी नगर निगम में करीब 40 हजार पंजाबी वोटर अहम रोल निभाने वाले हैं। अमीषा पंजाबी समुदाय से हैं। भाजपा विधायक असीम गोयल बनिया समाज से हैं, ऐसे में भाजपा में भी मेयर के लिए अभी तक पंजाबी प्रत्याशी उतारने की चर्चा रही है।

हुड्डा कनेक्शनः कांग्रेस से बगावत करने वाले निर्मल प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा को तो कोसते हैं लेकिन हुड्डा को कभी बुरा नहीं कहते। बिट्टू चावला कांग्रेस से एचडीएफ में आए, उसके बाद जूनियर हुड्डा उनके घर आ चुके हैं। यानी हुड्डा समर्थकों से मदद की आस है।

2 बड़े मुद्देः चौक-चौराहे सुंदर लेकिन सड़क-सफाई बेहाल और निगम में भ्रष्टाचार
एचडीएफ नेताओं व प्रत्याशी ने साफ कहा कि चौक-चौराहे सजाने पर लाखों-करोड़ों खर्च करने से शहर का भला नहीं होता। 3 साल से सड़क व सफाई व्यवस्था की हालत खस्ता है। नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बना है, उससे निपटेंगे।

2 बड़े दलों के गणित पर असर

भाजपाः टिकट दावेदारों में पंजाबी समुदाय से शैलजा सचदेवा (संदीप सचदेवा की पत्नी) व अर्चना छिब्बर (पूर्व विधायक वीणा छिब्बर की पुत्रवधू) के नाम राजनीतिक गलियारों में उछाले जा रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ के करीबी प्रदेश प्रवक्ता डॉ. संजय शर्मा की पत्नी डॉ. वंदना शर्मा, जिलाध्यक्ष रहे जगमोहन लाल कुमार की पत्नी प्रवीण कुमारी, नम्रता गौड़ समेत कई और नाम चर्चाओं में हैं। ध्यान रहे भाजपा हाईकमान ने यमुनानगर में पंजाबी, बनिया व ब्राह्मण वोटर निर्णायक होने के बावजूद बैकवर्ड क्लास से मदन चौहान को मेयर प्रत्याशी बना चौंकाया था।

कांग्रेसः प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा का आशीर्वाद किसे मिलता है, सबसे महत्वपूर्ण यही रहेगा। वैसे 3 बार की पार्षद रहीं दर्शना मेहता, पुत्रवधू राजरानी मेहता, पूर्व पार्षद हरदीप कौर (रिंकू पूनिया की पत्नी) के नाम चर्चाओं में हैं। विनोद शर्मा और फिर निर्मल सिंह व हिम्मत सिंह के पार्टी छोड़ने से लगे बड़े झटकों से उबरने के लिए कांग्रेस मौका तलाश रही है। बताते हैं कि सैलजा खेमा दो ऐसे नामों पर भी चर्चा कर रहा है, जो चौंकाने वाले हैं।

पूर्व मंत्री विनोद शर्मा, इनेलो, बसपा पर नजर : नगर निगम चुनाव की गतिविधियां तेज होने के साथ ही सिटी से दो बार के विधायक एवं पूर्व मंत्री विनोद शर्मा की सक्रियता बढ़ गई है। कांग्रेस छोड़ने के बाद उनकी बनाई हरियाणा जनचेतना पार्टी फ्लॉप शो रही। पिछले साल विधानसभा चुनाव में शर्मा किसी के समर्थन में सीधे नहीं आए, बस इशारों में बात हुई। वहीं इनेलो, बसपा व शिरोमणि अकाली दल की भूमिका पर भी नजर है। निर्मल सिंह का दावा है कि इनेलो व बसपा से समझौते की बात चल रही है।

30 साल: 2 बार बनिया, एक-एक बार पंजाबी और ब्राह्मण बिरादरी का प्रधान बना

राजनीतिक दलों के आंकड़ों के मुताबिक निगम में करीब 40 हजार पंजाबी, 36 हजार ब्राह्मण, 33 हजार बनिया वोटर हैं। 42 हजार एससी व 23 हजार बीसी वोटर हैं। अन्य जातियों के मतदाता भी हैं। 1990 से पहले अम्बाला सिटी में नगरपालिका थी। नगर परिषद गठन के बाद 1991 में रमेश सिंगला पहले अध्यक्ष बने। 1996 में निर्मल विज लगभग साढ़े तीन साल तक अध्यक्ष रहे।

2000 में राजेंद्र गुड्डू परिषद के अध्यक्ष रहे। 2005 में इंद्रपाल सिंह पम्मी अध्यक्ष बने, लेकिन कुछ दिनों बाद ही दुर्घटना में मौत हो गई। फिर हरीश सासन अध्यक्ष बने। 2010 में नगर निगम गठन के बाद 2013 में चुनाव हुए और मेयर पद एससी आरक्षित था। तब रमेश मल मेयर बने।




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अम्बाला | अमीषा चावला का मुंह मीठा कराते पूर्व मंत्री निर्मल सिंह।


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