चंडीगढ़/राई.2014 के विधानसभा चुनाव में सोनीपत जिले के राई क्षेत्र में मात्र 3 वोट से हारे इनेलो उम्मीदवार इंद्रजीत सिंह दहिया की याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया। प्रदेश में पहली बार डबल वोट मामले में हाईकोर्ट ने चुनाव जीते कांग्रेस के जयतीर्थ दहिया को अयोग्य घोषित करते हुए उनके चुनाव को अवैध करार दिया है। इससे 3 वोट से हारे इंद्रजीत अब 4 वोट से आगे हो गए हैं। वहीं, जयतीर्थ की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की है। इंद्रजीत पर नाहरी गांव में बूथ कैप्चरिंग कर 490 वोट डलवाने के आरोप हैं। जयतीर्थ की तरफ से कहा गया कि यदि उनके खिलाफ फैसला आता है तो उनकी भी सुनवाई की जाए।
जयतीर्थ इस्तीफा दे चुके हैं
विधानसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस प्रत्याशी जयतीर्थ को 36703 व इनेलो के इंद्रजीत को 36700 वाेट मिले। इंद्रजीत ने जयतीर्थ की 3 वोट से जीत को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट में राई क्षेत्र के बूथ नंबर 83,131, 112, 19, 22, 24 व 25 की ईवीएम खोली गईं थीं। रजिस्ट्रार व एक्सपर्ट ने ईवीएम का रिजल्ट हाईकोर्ट में जमा कराया। हाईकोर्ट में मतगणना के बाद पाया गया कि इंद्रजीत के 4 वोट ज्यादा हैं। जयतीर्थ को 36694 वोट प्राप्त हुए हैं और इंद्रजीत को 36698 वोट मिले हैं। इस फैसले से इंद्रजीत ने डबल वोट का जो आरोप लगाया था, वह सभी सिद्ध हो गया है। जयतीर्थ पहले ही विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैं। जयतीर्थ पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं।
फैसले का असर: जयतीर्थ को इस टर्म की पेंशन नहीं मिलेगी, इंद्रजीत को विजयी घोषित किया तो पांच साल का वेतन और भत्ते मिलेंगे
मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने को है। चुनाव की घोषणा भी हो चुकी है। जयतीर्थ को अयोग्य घोषित करार दिए जाने पर उन्हें इस टर्म की पेंशन नहीं मिलेगी। क्योंकि उन्हें जनप्रतिनिधि अधिनियम-1951 के तहत अयोग्य घोषित करार दिया गया है। हालांकि वे इससे पहले भी विधायक रह चुके हैं। इसलिए अन्य सुविधाओं पर फर्क नहीं पड़ेगा और पूर्व के कार्यकाल की पेंशन मिलती रहेगी। 2014 से 2019 तक उनकी ओर से लिया गया वेतन व भत्ते आदि की रिकवरी नहीं होगी। क्योंकि इसके बदले उन्होंने काम किया है। विधानसभा के रिटायर्ड एडिशनल सेक्रेटरी रामनारायण यादव ने बताया कि इंद्रजीत को विजयी घोषित किया जाता है तो उन्हें पांच साल का वेतन, भत्ते मिलेंगे। जयतीर्थ हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दे सकते हैं। खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव संबंधी याचिकाओं को तभी स्वीकार करता है जब यह लगे कि हाईकोर्ट से गंभीर चूक हुई है।
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