चुनावी मौसम में हर तरफ चर्चा सियासत की है। पार्टियों के अलावा स्थानीय मुद्दों को वोटर ज्यादा महत्वपूर्ण मान रहे हैं। दूसरे दिन यात्रा में सुबह 9 बजकर 20 मिनट पर पेहवा बस स्टैंड से शाहाबाद के लिए निकला। बस में पास में बैठी ताई धन्नो दूसरी महिला संतोष से बोलीं, इस सरकार में पेंशन तो हर माह टाइम पर मिलनी शुरू हो गई। पहले ऐसा नहीं था। रास्ते में इस्माईलाबाद अड्डे पर उतरा। 25 मिनट के बाद शाहाबाद की बस में चढ़ा तो हरदीप दो दोस्तों से चर्चा कर रहा था- इस बार युवाओं को नौकरी की तरह चुनाव में पार्टियां टिकट देंगी तो अच्छा रहेगा। दिल्ली अमृतसर हाईवे के पुल के नीचे उतर राष्ट्रीय हॉकी अकेडमी शाहाबाद में पहुंचा तो खिलाड़ी रीना, पूजा और आरती एक पत्थर की ओर इशारा कर बोली- 9 मई 2011 को तत्कालीन सीएम हुड्डा ने हॉकी महिला छात्रावास का शिलान्यास पत्थर रखा था जो आज तक नहीं बना। मौजूदा सरकार ने भी सुध नहीं ली।
बराड़ा: बस से 22 किमी. दूर बराड़ा पहुंचा। अंबाला जिले का वो हलका जो सबसे बड़ा रावण जलाने के नाम से प्रसिद्ध है। दुकान पर बैठे दीपक कुमार बोले- 2017 में यहां पर 211 फीट का रावण दशहरे पर जलाया था। दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब व यूपी से भी लोग देखने आते थे। चुनावी चर्चा करते हुए जगमेश सिंह बोला- इस सरकार के विधायकों ने काम तो कराएं नहीं, सिर्फ मोदी-खट्टर का नाम से खा रहे हैं।
साढ़ौरा से खट्टर का पुराना नाता रहा है : साढ़ौरा पहुचंने पर जूस की दुकान पर सक्षम से चर्चा हुई तो बोले-विकास में बीजेपी विधायक का ज्यादा रोल नहीं, यहां से सीएम का सीधा नाता है। सचदेव चुघ, सुमंत जैन बोले- सामने वाले पार्क में
1982 से 1987 तक मनोहरलाल खट्टर शाखा चलाते थे। वे कई परिवारों को बाईनेम जानते हैं। तभी नगरपालिका की सौगात दी है।
जगाधरी: बस में साढ़ौरा से 36 किलोमीटर दूर जगाधरी पहुंचा। बस स्टैंड से ऑटो में स्नातन धर्म चौक पर उतरा और समीप बर्तन मंडी में पहुंचा तो व्यवसायी सरदार गुरजिंद्र सिंह बोले- ये चुनाव दिवाली फीकी करेंगेे। त्योहार पर ही बर्तनों की बिक्री ज्यादा होती है, लेकिन लोग चुनाव में व्यस्तता भी रहेगी।
यमुनानगर: आटो में यमुनानगर के लिए चला तो सवार रणजीत सिंह बोले सरकार तो ठीक है, पर चुने हुए नेताओं की वजह से हालात माड़े बने हैं। सड़कें टूटी पड़ी हैं। अगले दिन सुबह यमुनानगर बस स्टैंड से रोडवेज बस में आटा बिलासपुर मार्ग पर अगली सीट पर बैठा यात्री धर्मसिंह बोला- छोरे इस बार इलेक्शन पहले से भी रोमांचक होगा। ब्रेकर पर बस उछली तो बोला- ड्राइवर साहब थोड़ी सहज ले ले, तू भी खट्टर की तरह स्पीड ना पकड़।
रादौर: कुछ ही देर में रादौर बिना छांव वाले सूने से बस स्टैंड पर बस आकर रुकी। यात्री सड़क साइड में पेड़ की छांव तले इंतजार कर रहे थे। शहर की अंदर गया तो राजू चायवाला के पास बैठे रोहित, यश व रामकेश ने कहा कि सारे राजनीति वाले सिर्फ चुनाव के समय ही पूछते हैं बाद में कोई जानता तक नहीं।
बाय ट्रेन: शाम 6 बजकर 19 मिनट पर कुरुक्षेत्र से जींद के लिए ट्रेन में सवार हुआ तो यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राएं मिलीं। बोले-सरकार बेशक चालान काटे, हमने तो रेल की सवारी करनी है। कैथल के लिए मात्र दस रुपए की टिकट है। चुनावी चर्चा करते हुए कहा कि इस बार चुनाव में जो भी कैंडीडेट सही होगा, उसे ही जिताएंगे। ट्रेन में पबनावा का रहने वाला छात्रज्ञ जोगेंद्र बोला भजनलाल सरकार में हमारे तो दो किसान शहीद करा दिए थे। राजनीति वाले सारे एक थाली के चट्टे बट्टे हैं।
हरियाणा की ऐसी मंडी जहां सुनहरी की होती है खरीद
रादौर से लाडवा की बस में सवार सुनीता और टीचर प्रियंका काे लगता है कि विपक्ष थोड़ी सीट ही ले पाएगा। 12 किलोमीटर दूरी पर लाडवा के अंबेडकर चौक पर बस रुकी। चौक के पास स्थित दुकान पर बैठे 65 वर्षीय बुजुर्ग नंदलाल बोला- इत्थे आजा। इशारा कर कहा इस चौक पर आज तक लाइट नहीं जगती। रोज एक्सीडेंट होते हैं। लाडवा की अनाजमंडी हरियाणा पंजाब की ऐसी मंडी है जहां सुनहरी (अजवायन जैसी) फसल खरीदी जाती है। बोले-लाडवा की रेलवे कनेक्टिविटी की मांग भी पूरी नहीं हो रही। यहां से कुरुक्षेत्र की बस में चढ़ा तो यूनिवर्सिटी की छात्रा सीमा, नीलम व श्वेता खिड़की के पास भीड़ में चढ़ नहीं पाई तो बोलीं-बेटियाें के लिए स्पेशल बस चलनी चाहिए। कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर उतर श्रद्धालु से चर्चा की।
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