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Monday, 23 September 2019

जीटी बेल्ट पर सत्तादल के किले सुरक्षित, पब्लिक की जुबान पर फिलहाल कोई विकल्प दूर-दूर तक नहीं

जीटी बेल्ट पर करनाल, कुरुक्षेत्र, अम्बाला और सोनीपत की जनता विधानसभा चुनाव को लेकर क्या सोचती है और क्या चाहती है यह जानने के लिए भास्कर पानीपत के चीफ रिपोर्टर सुभाष राय ने ग्राउंड रिपोर्ट के पहले चरण में बस, ट्रेन, ऑटो और रिक्शा से की 349 किमी की यात्रा...

विज्ञापन में एक कैरेक्टर कार के इंटीरियर में बदलाव और दूसरा घर में टीवी-फ्रिज लगाने की बात करता है और इसी तरह से...। विज्ञापन के क्लाइमेक्स में कहा जाता है कि टायर बदलने का ख्याल आए न आए, इसलिए वह जो लंबा चले। यानि- सबको कुछ न कुछ बदलने की चिंता है, लेकिन टायर की नहीं। हरियाणा में विधानसभा चुनाव के दौर में भी कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है। लोग कहते हैं कि मौजूदा सरकार ने अपने राज में क्या-क्या अच्छा किया है, यह बताना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि कुछ तो अच्छा ही हो रहा है।

कुछ लोग कहते हैं कि पब्लिक की सोच में ही अभी रूलिंग पार्टी ही है। मोदी का चेहरा भी प्रदेश में असर बनाए हुआ है। साफ है कि केंद्र सरकार के फैसलों का असर भी प्रदेश के विधानसभा चुनाव में रहेगा। सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र से अम्बाला कैंट तक यात्रा में एक बात सामने आई कि माैजूदा सरकार के लिए जीटी बेल्ट सबसे सुरक्षित है। पब्लिक की जुबान पर विकल्प के तौर पर कोई अन्य दल दूर-दूर तक भी नहीं है। पानीपत से बस में चढ़ने और अम्बाला कैंट में बस स्टैंड के बाहर पूर्ण सिंह के ढाबे पर उतरने के बाद यात्रा में लोगों ने चुनाव और मौजूदा सरकार को लेकर क्या-क्या कहा है पेश है विस्तृत रिपोर्ट।

पानीपत टूअम्बाला कैंट- श्रीकृष्ण कहते हैं क्रोध भ्रम पैदा करता है... पर यहां ताे ढाबे वाला क्रोध में है

चर्चा राजनीति की छिड़ी तो हरियाणा रोडवेज बस में बैठे करनाल के कपड़ा व्यापारी गुलशन कहते हैं कि व्यापार में कुछ परेशानी बढ़ी है, लेकिन खुश हैं। क्योंकि यह वो सरकार नहीं जो अपनी जेबें भरे, जैसा पहले था। बात आगे नहीं बढ़ पाई तो इस बीच धर्मनगरी कुरुक्षेत्र पहुंचने पर पीपली में बस रुकी तो ढाबे पर गीता के उपदेश सुनाई दिए। भगवान कृष्ण क्रोध के विषय पर अर्जुन से कहते हैं कि क्रोध भ्रम पैदा करता है।...पर पीपली के ढाबा मालिक अंकुर मल्होत्रा कारोबार में बढ़ी आैपचारिकताओं से कुछ क्रोधित हैं। कहते हैं कि नियम अच्छे हैं, लेकिन रिजल्ट सही नहीं आ रहा है। व्यापारी पैसे देने को तैयार हैं, लेकिन इतना लंबा-चौड़ा सिस्टम न बनाओ। पर अंकुर यह भी मानते हैं कि मौजूदा दौर में इस सरकार का कोई विकल्प नहीं है।

गुड़गांव में जॉब करने वाले अम्बाला के युवा चंद्र प्रकाश कहते हैं कि समस्या तो आज भी वही हैं- ट्रैफिक सिस्टम ठीक नहीं, सड़कों पर आज भी पानी भरता है, लेकिन कुछ न कुछ अच्छा हो रहा है। चंद्र कहते हैं प्रदेश में अाज भी मोदी ही बड़ा चेहरा है। दोपहर 2.25 बजे बस अम्बाला कैंट बस स्टैंड के बाहर पूर्ण सिंह के ढाबे के पास रुकी। यहां हर तरफ ढाबे हैं और सबने लिख रखा है कि ‘असली पूर्ण सिंह का ढाबा’। यहां असली की पहचान मुश्किल है। यहां पास की दुकान पर चाय की चुस्कियां लेते राजन ने बताया पहली बार शहर में विकास कार्य बड़े स्तर पर हुए हैं। साथ बैठे मजबूर बोले- लेबर खुश नहीं है जी। इतने में आवाज सुनकर सड़क किनारे चादर डालकर खिलौने बेच रहे 71 साल के जयपाल भी उठकर आ गए। जयपाल ने कहा कि राजनीति की बात क्या बताऊं। सुबह बीवी ने कहा था- आलू ले आना, अब बचत हो तब न आलू खरीदूं। तमाम चर्चाओं के बाद कैंट स्टेशन पहुंचा तो दिल्ली जाने वाली मालवा एक्सप्रेस 42 मिनट लेट थी। 6 सदस्यों की टीम प्लेटफार्म-3 पर थीं। दीपक जोशी ने कहा कि कांग्रेस में 10 माई-बाप हैं, जनता किस पर भरोसा करें। इसी बीच ट्रेन पहुंच गई और मैं उसमें सवार होकर दिल्ली की ओर चल दिया।

मुद्दे: व्यापारी इसलिए परेशान हैं, क्योंकि औपचारिकताएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। लोग कहते हैं कि हमारे पास देने के लिए पैसे तो हैं लेकिन समय नहीं है। इसलिए यह सिस्टम सरल होना चाहिए।

अम्बाला कैंटटू दिल्ली- मुकेश का पुराना अनुभव ठीक नहीं, अंग्रेज सिंह मानते हैं कि सरकार के लिए सब बराबर

काेच एस-6: ट्रेन में बैठे पूर्व खेल अधिकारी अम्बाला के मुकेश रिखी ने कहा कि पहले की सरकार का मेरा अनुभव ठीक नहीं रहा है। कहां 15 लाख रुपए देकर नौकरी लगती थी। इस सरकार ने कोच के लिए 600 पद निकाले, 400 ने जाॅइन किया। दावे से कह सकता हूं कि किसी से एक पैसा नहीं लिया गया। आज की तारीख में बीजेपी अन-बिटन है।


एस-8 : कुरुक्षेत्र के दुर्गा प्रसाद यादव- बोले कि कांग्रेस अगर सही प्रत्याशी उतारे तो कुरुक्षेत्र में कुछ सीट पर टक्कर का मुकाबला होगा कांग्रेस और भाजपा में। आगरा में बैंक में नौकरी करने वाले कुरुक्षेत्र के सुभाष चंद्र ने कहा- सरकार केंद्र की हो या प्रदेश की- जब तक बैंक डिफॉल्टरों पर सख्ती नहीं हाेगी, तब तक आर्थिक सुधार संभव नहीं है। जनता ईमानदारी से टैक्स चुका रही है और कुछ प्रभावशाली लोग हजार करोड़ों का चूना लगाकर फरार हाे रहे हैं। बैंकों के घाटे की मार भी आम आदमी पर ही पड़ रही है।

एस-5 : सोनीपत के सरढ़ाना गांव के अंग्रेज सिंह मलिक अपनी पत्नी सुनीता के साथ लुधियाना से लौट रहे थे। बेटी की बीएससी नर्सिंग की परीक्षा थी। दंपती ने कहा- लोगों को विश्वास है इस सरकार में। इसलिए सब जाति का इस सरकार को समर्थन है।

एस-12 : दोनों गेट के बीच में एक नहीं पांच युवक बैठक हैं, दो युवक सोनीपत के। एक संतलाल दूसरे अमित। अस्पताल में काम करने वाले संतलाल- मुफ्तखोरी के विरोधी। बोले- कांग्रेस ने लोगों को मुफ्तखोरी की आदत डालने का प्रयास किया, पर फेल हो गई। क्योंकि फ्री की चीज लोगों को अब पसंद नहीं है। संतलाल बाेले- पहले फ्री की बिजली आती थी इसलिए कभी आई और कब गई पता नहीं चलता था। अब जो कभी कभार ही जाती है, क्योंकि सरकार जबरदस्ती बिल वसूल रही है। यह अच्छा है।
शाम 7:32 बजे ट्रेन दिल्ली स्टेशन पहुंची। पहले दिन पब्लिक का रुझान यही मिला कि मौजूदा सरकार पर लोग विश्वास दिखा रहे हंै।

मुद्दे: बैंक के डिफॉल्टरों का मुद्दा आमजन के लिए मायने रखता है। लोग कहते हैं देश-प्रदेश की तरक्की के लिए पैसे खाने वालों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। प्रचार का डमरू बजाने वाली सरकार इस पर कुछ करे।



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