
असली चुनाव शुक्रवार को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से होगा। हालांकि श्राद्ध पक्ष और टिकट के पचड़े की वजह से नामांकन नवरात्र में ही आने की संभावना है। कांग्रेस चुनाव समिति ने पार्टी के सभी मौजूदा विधायकों को टिकट देने की पैरवी की है। ये होना ही था चूंकि ज्यादातर हुड्डा खेमे के हैं। किरण-सुरजेवाला-बिश्नोई का अपना दम है ही। विधायकों की टिकट पक्की होने से दूसरे खेमों के नेता ताल बिगाड़ने में जुटेंगे। जैसे तंवर पर गाली गलौज करने का आरोप लगाने वाले राई विधायक जयतीर्थ दहिया के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तंवर समर्थकों ने उन्हें गद्दार कह दिया। टीम बढ़ा रही भाजपा ने हॉकी के सूरमा रहे संदीप सिंह, ओलिंपियन कुस्तीबाज योगेश्वर को भगवा पटका पहनाया दिया। शाहाबाद के सूरमा को पिहोवा से मैदान में उतारने की चर्चा है। पंजाब में भाजपा के सहयोगी शिअद ने धोखेबाज पार्टी बताते हुए वो गठबंधन तोड़ने का एलान किया जो कभी हुआ ही नहीं था। वजह है- भाजपा उसके लिए कोई सीट छोड़ने को तैयार नहीं जबकि पूर्व का सहयोगी इनेलो अम्बाला सिटी, सिरसा की कालांवाली सीट अकालियों की तराजू के लिए छोड़ता था। भाजपा ने अकालियों के इकलौते विधायक बलकौर को भी कमल थमा दिया। आखिर में, बता दें कि लोकसभा से विधानसभा के बीच तीन गठजोड़ खोल चुकी बसपा अब किसी बंधन में नहीं बंधेगी।
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