उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता से हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है जो हमें सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलने के साथ ही मानव कल्याण का संदेश देती है। आत्मा प्रत्येक जीव में विद्यमान होती है और भगवान कण कण में विराजमान है। हमें सच्चाई, आत्मविश्वास,जिज्ञासा और दृढ़ इच्छा शक्ति आगे बढ़ने में ऊर्जा प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि गीता हमें सत्वगुण और रजोगुण को विकसित करने में सहायक है और तमोगुण को नियंत्रित करती है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य त्रिगुणों से उबरना है। हम श्रीमद्भागवत गीता से सत्वगुण को प्राप्त कर सकते हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.जितेन्द्र भारद्वाज ने विश्वविद्यालय की ओर से शैलजा दीदी को स्मृति चिह्न देकर, कुलसचिव डॉ.जितेन्द्र भारद्वाज की माता चंद्रकला देवी ने शॉल भेंटकर और कुलपति प्रो.आरके मित्तल ने शैलजा दीदी को विश्वविद्यालय में चरित्र निर्माण एवं विकास पर प्रारंभ किए पाठ्यक्रम की प्रति भेंट कर सम्मानित किया।
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