
जीटी राेड स्थित गोशाला के मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथा वाचक महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णाचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं काे संबाेधित किया। उन्हाेंने कहा कि भगवान कृष्ण से आप कोई भी संबंध बना सकते हो जैसे कोई भगवान कृष्ण को भाई मानता है कोई पिता तो कोई पति पर अन्य देवी देवता से आप सेवक व भगवान के अलावा और कोई संबंध नहीं बना सकते। कृष्ण हिन्दू धर्म में विष्णु के अवतार हैं। सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्व पापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं। जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है, तब-तब भगवान विष्णु किसी किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैं।
श्री कृष्ण का जन्म क्षत्रिय कुल में राजा यदु कुल के वंश में हुआ था। स्वामी ने कहा कि भगवान कृष्ण ने गीता में भी कहा है हजार हजारों में कोई बिरला मनुष्य ही मुझे जानने का प्रयास करता है। इस माैके पर जयकुमार गर्ग, रामप्रकाश गर्ग, सत्यनारायण गर्ग, कृष्णलाल गर्ग, मामन, रामकुमार, गाेविंद, शिवम, हरीश, उर्मिल, कृष्णा, मीना, साेनम माैजूद रहीं।
श्री मद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह का वर्णन करते कृष्णाचार्य महाराज।
पानीपत. जीटी राेड गोशाला में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह में उपस्थित श्रद्धालु।
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