हिसार (भूपेश मथुरिया).सामाजिक, आर्थिक और जातीय गणना 2011 के विवादित डेटा को बिना अपडेट किए अयोग्य प्रार्थियों को पांच लाख रुपए तक कैशलेस बीमा का लाभ दिया जा रहा है। इनके अयोग्य होने के बावजूद लाभार्थियों की सूची में रिटायर्ड हेल्थ डायरेक्टर से लेकर एचसीएस के रिश्तेदारों तक के नाम हैं।
सेक्टरों व पॉश इलाकों में बनी आलीशान कोठियों में रहने वाले लखपति-करोड़पति परिवार, जोकि स्वयं इलाज का खर्चा उठा सकते हैं वे तक लिस्ट से बाहर नहीं हुए हैं। औपचारिक सर्वे कर अयोग्य पात्रों को योजना की सूची शामिल किया है, जबकि जरूरतमंद लाभ पाने के लिए सीएम विंडो, सीएमओ व डीसी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे में सूची अपडेट का इंतजार है, लेकिन उससे पहले योजना के उच्चाधिकारियों ने फर्जीवाड़ा रोकने के लिए हर जिले में एंट्री फ्रॉड यूनिट का गठन कर दिया है।
सीएमओ को इंचार्ज बनाया है, जिनके अधीन योजना के डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफिसर फ्रॉड रोकने का काम करेंगे। यह यूनिट अब किसी भी दिन इम्पैनल अस्पतालों और लाभार्थियों के घर दस्तक देकर क्लेम व इलाज संबंधित दस्तावेज जांच कर सकती हैं। बता दें कि दैनिक भास्कर ने अक्टूबर 2018 में उक्त मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद समय-समय पर योजना संबंधित अपडेट सूचनाएं व खुलासे प्रकाशित होते रहे हैं। अब योजना में और पारदर्शिता लाने के लिए सिस्टम को अपडेट किया जा रहा है।
एंटी फ्रॉड यूनिट के बारे में जानें
1. योजना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए स्वास्थ्य मुख्यालय पर ऑनलाइन नेशनल एंटी फ्रॉड सॉफ्टवेयर काम कर रहा है। जिला स्तर पर एंटी फ्रॉड यूनिट काम करेगी। ये फर्जी लाभार्थी व क्लेम पर नकेल कसी जाएगी। हिसार में करीब 15 हजार लाभार्थियों के कार्ड्स डी-एक्टिव हुए हैं। इन पात्रों के संबंधित डेटा एवं दस्तावेज (नाम-पता-मेंबर्स की संख्या-फोटो) का एंटी फ्रॉड सॉफ्टवेयर में सर्चिंग के दौरान मिलान नहीं होना पाया है।
2. एंटी फ्रॉड यूनिट जिले के इम्पैनल सरकारी-गैर सरकारी अस्पतालों के अलावा कैशलेस इलाज करवाने वाले मरीज के घर जाकर पड़ताल करेगी। दस्तावेज में गड़बड़ी या फिर अयोग्य व्यक्ति लाभ उठाते मिले तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होगी। धोखाधड़ी व जालसाजी के तहत एफआईआर का प्रावधान है। इसके साथ ही जितनी राशि को क्लेम किया है वह रिकवर की जाएगी। अस्पताल का इम्पैनल भी रद्द होगा। नई व्यवस्था से मॉनिटरिंग बढ़ गई है, जिससे योजना के हर स्तर पर होने वाली गतिविधियों पर यूनिट की पैनी नजर रहेगी।
ये भी जानिए...
1. लाभार्थी की मृत्यु पर ऑन द स्पॉट विजिट जरूरी : लाभार्थी की इलाज के दौरान मृत्यु हो जाती है तो योजना के जिला नोडल ऑफिसर अस्पताल पहुंचकर जांच करेंगे। मृत्यु कैसे हुई, क्या इलाज चल रहा था, इलाज में कोताही तो नहीं बरती है इत्यादि। इसके बाद क्लेम पास करवाने के लिए संपूर्ण दस्तावेज जुटाकर आगामी कार्यवाही की जाएगी।
2. ज्यादा सदस्य भी डिटेक्ट करता है सॉफ्टवेयर : अगर परिवार में सदस्यों की संख्या 5 से अधिक है तो न सिर्फ एंटी फ्रॉड सॉफ्टवेयर यह बात पकड़ता है बल्कि नोडल ऑफिसर भी अलर्ट होते हैं। वाकई में परिवार के मुखिया द्वारा दर्शायी सदस्याें की संख्या सही है या नहीं, इसके लिए उनके घर व आसपास के लोगों, पार्षद एवं सरपंच से जानकारी जुटाई जाती है।
आशा को मिलेगा 5 रुपए मानदेय, 20 हजार नए कार्ड्स बने
गोल्डन कार्ड बनाने के लिए बायोमीट्रिक, इलाज से पहले और डिस्चार्ज होने पर भी बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दी है। अभी गोल्डन कार्ड काफी कम बने हैं। लाभार्थियों के कार्ड्स बनवाने के लिए आशा वर्करों का सहयोग लिया है। अब इन्हें प्रति कार्ड बनवाने पर पांच रुपये मानदेय मिलेगा। गोल्डन कार्ड्स से कैशलेस इलाज मिल सकेगा। इसलिए हर लाभार्थी आयुष्मान काउंटर्स पर जाकर गोल्डन कार्ड बनवा सकता है। यह सुविधा सीएससी सेंटर्स पर उपलब्ध है।
सॉफ्टवेयर पकड़ रहा संदिग्ध डिटेल्स
एंटी फ्रॉड सॉफ्टवेयर भी तैयार हुआ है। इसमें लाभार्थियों की सूची को अपलोड किया है। गोल्डन कार्ड बनाने के लिए आने वाले आवेदन को सॉफ्टवेयर में दर्ज डेटा से मैच किया जाता है। यह सॉफ्टवेयर फोटो-नाम-पता गलत या मिस मैच होने पर अलर्ट करता है। संदिग्ध डिटेल्स व लाभार्थी मानकर उनकी जांच करवाई जाती है। जिले के नोडल ऑफिसर सप्ताह के एक दिन तमाम संदिग्ध पात्रों के दस्तावेजों की पुन: जांच करते हैं। योग्य है या नहीं, इसका पता लगाया जाता है।
एंटी फ्रॉड यूनिट रोकेगी फर्जीवाड़ा
रि. हेल्थ डायरेक्टर व एचसीएस के रिश्तेदारों की डिटेल चैक करवाई थी। उन्होंने अभी तक केवाईसी अपडेट नहीं करवाया है। यानी उन्होंने लाभ नहीं उठाया है। यह वर्ष 2011 में हुए सर्वे की लिस्ट है, जिसके तहत लाभार्थियों को कैशलेस बीमा का लाभ मिल रहा है। जिला स्तर पर एंटी फ्रॉड यूनिट का गठन कर दिया है जोकि फर्जीवाड़ा रोकेगी। - डॉ. मनीष पचार, डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफिसर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना।
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