बिजली उपभोक्ताओं के 1.75 करोड़ के बिल हड़पे - OTA BREAKING NEWS

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Friday, 17 January 2020

बिजली उपभोक्ताओं के 1.75 करोड़ के बिल हड़पे

बिजली बिल चुकाने के बाद भी यदि अगले बिल में पुरानी रकम जुड़कर आ रही है तो सकता है आपके साथ ठगी हुई हो। सब डिवीजन स्तर पर बिल कलेक्शन का ठेका लेने वाली एजेंसी की रसीदें कई जगह फर्जी निकली हैं।

बिजली निगम के साथ तय शर्तों के मुताबिक ठेका लेने वाली एजेंसी ई-पे इंफो सर्व प्राइवेट लिमिटेड को प्रज्ञा वेयर सॉफ्टवेयर के जरिए क्यू आर कोड स्कैन वाली रसीदें देनी होती हैं, लेकिन एजेंसी के कर्मी दो साल में 3 बार रसीदों का पैटर्न बदल चुके हैं। अभी भी तय मानकों वाली रसीदें नहीं दी रही। इसी से घोटाला चल रहा है। एजेंसी अम्बाला, पंचकूला, कैथल, यमुनानगर व पानीपत में 1.5 करोड़ गबन के केस अपने कर्मियों के दर्ज कराकर औपचारिकता कर रही है। इसी तरह की अनियमितता के चलते दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम तो मार्च 2018 में एजेंसी का टेंडर खत्म कर चुकी है, जबकि यूएचबीवीएन में जारी है।

अम्बाला, पानीपत, कैथल, यमुनानगर, पंचकूला और भिवानी में ही फर्जी रसीदों के मामले आ चुके हैं सामने, दक्षिणी हरियाणा बिजली निगम पहले ही रद्द कर चुकी एजेंसी का ठेका, उत्तरी निगम में जारी

उपभोक्ताओं ने बिल चुकाए, लेकिन अगले बिलों में जुड़कर आ रहे पुराने बिल

यूं समझें पूरा मामला

एजेंसी ने इस काम के लिए उत्तर हरियाणा में सभी डिवीजन स्तर पर अपने को-आर्डिनेटर के साथ कैशियर, क्लेक्शन एक्जीक्यूटिव रखे हैं और कई जगह रिटेलर स्तर पर फ्रेंचाइजी भी दी। यूएचबीवीएन प्रति बिल एजेंसी को पांच रुपए दे रही है। एजेंसी ने अपना तीन रुपए का मार्जन रखकर फ्रेंचाइजी को दो रुपए देने शुरू कर दिए। बिजली निगम का एग्रीमेंट किया था कि बिल चुकाने वाले उपभोक्ता को प्रज्ञा वेयर सॉफ्टवेयर के जरिए रसीद देनी होगी, लेकिन एजेंसी ने एग्रीमेंट की बजाए पहले मोहर लगा रसीदें दीं, उसके बाद कंप्यूटराइज्ड देनी शुरू की। तीसरी बार तय सॉफ्टवेयर की बजाय अपने सॉफ्टवेयर के जरिए फर्जी क्यू आर कोड वाली रसीदें देने लगे। यदि प्रज्ञा वेयर सॉफ्टवेयर से बिल का भुगतान हो तो पैसा सीधे बिजली निगम के खाते में जाता है, जबकि कई जगह एजेंसी कर्मियों ने पैसा अपने पास रखा।

3 बार बदलीं रसीदें, क्यूआर कोड गायब

बिजली उपभोक्ताओं को पहले साल में हाथ से काटी रसीदें दी गईं। इस पर मीटर नंबर, अमाउंट, कैश या पार्ट पेमेंट, तारीख और मोबाइल नंबर लिखा होता था। कंपनी का बड़े-बड़े अक्षरों में नाम के साथ-साथ यूएचबीवीएन का लोगो लगाया गया। रसीदें साल 2017 से मई 2018 तक चलीं। बाद में कंप्यूटराइज्ड रसीदें (जैसे टोल की रसीद) दी गई, इनकी इंक कुछ दिन बाद गायब हो जाती है, जबकि इस पर कोई क्यूआर कोड नहीं था। उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ीं तो कंपनी ने उपभोक्ताओं को धोखा देने के लिए अपने सॉफ्टवेयर से फर्जी क्यू आर कोड देना शुरू कर दिया। इसीलिए बिल होने के बावजूद उपभोक्ताओं का पैसा बिजली निगम के पास नहीं पहुंच रहा है। बिल चुकाने के बावजूद निगम के खातों में उपभोक्ताओं की तरफ बकाया खड़ा है।

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4 जिलों के एसडीओ लिख चुके चिट्‌ठी

अम्बाला के तीन एसडीओ, कुरुक्षेत्र के दो एसडीओ, यमुनानगर से एक, करनाल से दो एसडीओ समेत अन्य जिलों के एसडीओ भी ई-पे के साथ-साथ निगम अफसरों को गड़बड़ी के बारे में पत्र लिख चुके हैं। अम्बाला में तो एक्सईएन और एसई को उपभोक्ताओं के बिल विवाद निपटाने के लिए खुले दरबार लगाने पड़े। एसडीओ ने लिखा है कि उपभोक्ता के पास बिल भरने की रसीद है लेकिन बिल बिजली निगम के खाते में जमा नहीं हुआ है।

यह है क्यूआर कोड की असली रसीद।

5 जिलों के थानों में केस

अम्बाला में 36 लाख की धोखाधड़ी

पंचकूला में 6.80 लाख की धोखाधड़ी

पानीपत में 73 लाख की धोखाधड़ी

कैथल दो लाख की धोखाधड़ी

यमुनानगर के साढौरा में 33 लाख रुपए की धोखाधड़ी

भिवानी जिले के 5 थानों में 24.20 लाख रुपए की धोखाधड़ी

बिजली निगम ने ई-पे इंफो सर्व प्राईवेट लिमिटेड एजेंसी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह प्रज्ञा वेयर सॉफ्टवेयर के जरिए बिल लेगी। यदि कहीं पर मामला सामने आता है उस पर यूएचबीवीएन की ओर से कार्रवाई की जाएगी। - अनुराग नूनचाहल, फाइनेंस एडवाइजर विंग, हेडक्वार्टर, यूएचबीवीएन।



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