लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अयोध्या में मस्जिद के लिए 5 जगहें चिह्नित की हैं। पांचों स्थान साधु-संतों की इच्छानुसार पंचकोसी परिक्रमा के दायरे से बाहर हैं, ताकि भविष्य में कोई विवाद न उपजे। हालांकि, मुस्लिम पक्षकार को कौन सी जमीन दी जाएगी? इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अयोध्या केस के फैसले में प्रदेश सरकार को मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन दिए जाने के आदेश दिए थे। यह जमीन अयोध्या के किसी प्रमुख स्थान पर होना चाहिए।
इन पांच जगहों को किया चिह्नित
अयोध्या प्रशासन ने मस्जिद के लिए जिन जगहों का चयन किया है, उसमें मलिकपुरा, डाभासेमर मसौधा, मिर्जापुर, शमशुद्दीनपुर और चांदपुर मेंगांव स्थित जमीनें हैं। यह सभी जमीनें अयोध्या से निकलने वाले और अलग-अलग शहरों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर हैं। अयोध्या प्रशासन ने शासन को भेजे चार स्थान अयोध्या-फैजाबाद मार्ग पर, अयोध्या-बस्ती मार्ग पर, अयोध्या-सुल्तानपुर मार्ग पर और अयोध्या-गोरखपुर मार्ग पर चिह्नित किए हैं और पांचवां स्थान राजमार्ग पर परिक्रमा मार्ग से दूर प्रस्तावित है। हालांकि, चिह्नित जमीनों पर अभी गांव वालों का अवैध कब्जा है। इन जमीनों पर गांव वाले खेती कर रहे हैं। वहीं, गांव की कुछ महिलाएं उसी जमीन पर उपले (कंडा) भी बनाती हैं।
15 किलोमीटर की परिधि में होती परिक्रमा
पंचकोसी परिक्रमा 15 किलोमीटर की वह परिधि है, जिसे अयोध्या का पवित्र क्षेत्र माना जाता है। पंचकोसी परिक्रमा हर साल मानसून के समय 2 दिन की होती है। श्रद्धालु पहले सरयू नदी में डुबकी लगाते हैं। उसके बाद शहर के चारों ओर 15 किलोमीटर की परिक्रमा करते हैं। कहा जाता है कि प्रयागराज, हरिद्वार, मथुरा और काशी के लगभग 50,000 साधु-संत इस कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं। फिलहाल, प्रशासन की तरफ से चिह्नित की गई पांचों जमीनें इस पंचकोसी परिक्रमा से बाहर हैं।
वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने की पेशकश कर चुकी सरकार
योगी सरकार ने पंचकोसी परिक्रमा परिधि के बाहर की जमीन पर मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को पेशकश की है। लेकिन, अभी तक सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा फैसला लिया नहीं गया है। वहीं, अन्य मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा ए हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जमीन लेने के प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं।
9 नवंबर को आया था फैसला
9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने दशकों से चले आ रहे अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की बेंच ने विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया। जबकि, कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या नगर के अंदर ही अलग जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था।
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