भास्कर न्यूज | बवानी खेड़ा
जीएम से लेकर सीएम तक मिलने के बाद भी बलियाली, रामूपुरा व सुई में बसों की संख्या बढ़ने की बजाए घट गई है। लगातार 20 साल से हर घंटे के अंतराल पर बसों की सर्विस होती थी लेकिन अब दो से लेकर तीन घंटे तक बसों का इंतजार करना पड़ता है। भिवानी जाने के लिए साढे तीन बजे के बाद एक भी बस नहीं है। दूसरी तरफ बवानी खेड़ा में काॅलेज में जाने के लिए भी छात्राओं को हर रोज 20 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
1993 से 2013 तक चार बसें चलती थीं
रामूपुरा की सरपंच कुसुमलता, सुरेश रंगा, ग्रामीण युवा विकास मंडल के अध्यक्ष सचिन सरदाना, डाॅ. भीम राव अम्बेडकर युवा संगठन के प्रदेशाध्यक्ष संजय चौहान व गौरव वशिष्ठ ने बताया आदि ने बताया तीन गांवों की जनसंख्या 30 हजार से भी ज्यादा है। 1993 से अप्रैल 2013 तक चार बसें चलती थी, जो कि हर घंटे बलियाली से बवानी खेड़ा तथा बलियाली से भिवानी के आती व जाती थी। अब कड़कती ठंड में भी विद्यार्थियों को लटक कर भिवानी पढ़ने के लिए जाना पड़ता है। सुबह के समय तो बसों में इतनी भीड़ होती है कि लड़कियों को भी खिड़कियों में लटकना पड़ता है। पहली बस सुबह 6 बजे तथा अंतिम बस सात बजे आती थी। परन्तु अब हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। ममता, सोनिया, ज्योति, रेनू, मंजीत, संगीता, डिम्पल, स्वाति, बरखा, अंजली, नेहा, मुस्कान, पिंकी, कांता, प्रियंका विशाखा ने बताया साढे छह साल पहले गांव में हर घंटे के अंतराल से जो बसें आती थी अब वो 2 से तीन घंटे के अंतराल में आती है। गांव से पहली बस साढे सात, दूसरी नौ बजकर 40 मिनट, तीसरी एक बजकर 30 मिनट तो चौथी व अंतिम बस साढे तीन भिवानी जाती है। दूसरी तरफ बवानी खेड़ा के लिए काॅलेज टाइम के लिए एक भी बस नहीं है।
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