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Sunday, 19 January 2020

निगम आय खुद बढ़ाए और खर्च करे

सरकार का फरमान: सीएम मनोहर ने चंडीगढ़ में मेयर और निगम कमिश्नर को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री आवास चंडीगढ़ में मेयर और निगम कमिश्नर की हुई बैठक के बाद इस बात के संकेत मिले हैं कि आने वाले दिनों में शहरवासियों पर सीवर-पानी और प्रॉपर्टी टैक्स का भार पड़ने वाला है। इसी वित्तीय वर्ष में इसकी घोषणा भी संभव है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नगर निगम को अपनी आय खुद बढ़ानी होगी। जो पैसा आए उसे शहर के विकास और सुविधाओं पर खर्च किया जाए। यही नहीं मुख्यमंत्री ने मेयर और निगम कमिश्नर के कई अधिकारों में भी बढ़ोतरी करने का भी संकेत दिया है, ताकि हर काम के लिए चंडीगढ़ आने अथवा फाइलें भेजने की जरूरत न पड़े।

सरकार ने मेयर और कमिश्नर को 10 करोड़ रुपए तक के वित्तीय अधिकार देने का निर्णय लिया है। करीब चार घंटे तक चली मैराथन बैठक में मेयर सुमन बाला और निगम कमिश्नर डॉ. यश गर्ग ने मुख्यमंत्री के सामने निगम का लेखा-जोखा प्रस्तुत किए और कई कई सुझाव भी दिए जिसे मुख्यमंत्री ने सहमति जताई। सीवर-पानी और प्रॉपर्टी टैक्स को रिवाइज करने के लिए जल्द ही मेयर सुमन बाला निगम पार्षदों के साथ बैठक करेंगी। सभी पार्षदों से विचार विमर्श करने के बाद इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने भी टैक्स बढ़ाने की वकालत करते हुए कहा कि पार्षदों की बैठक के बाद टैक्स रिवाइज किए जाएंगे। यही समय की मांग भी है।

सुझाव| निगम व हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की संपत्ति की नीलामी से जुटाएं पैसे

निगम की आय बढ़ाने के लिए ये दिए गए सुझाव

उपाय एक: मेयर सुमन बाला ने बताया कि निगम सीमाक्षेत्र में 1200 से अधिक दुकानें लीज पर दी हैं। जिनका किराया कम है। मुख्यमंत्री को सुझाव दिया गया है कि यदि सरकार कलेक्टर रेट में थोड़ी छूट दे तो उन दुकानों को बेचकर मोटी रकम की व्यवस्था की जा सकती है। इस पर मुख्यमंत्री ने अपनी सहमति दे दी है और डीसी को पत्र लिखकर इसे प्रमुखता से लागू कराने को कहा है।

उपाय दो: 200 वर्ग गज से अधिक के जो भी प्लाट हैं उनका सब डिवीजन किया जाए। इससे बड़ी संख्या में सब डिवीजन हो सकेंगे और निगम को राजस्व भी मिलेगा। वर्तमान में सब डिवीजन कराने पर एक प्लाट की साइज कम से कम 60 वर्ग गज तक होनी चाहिए। जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में सब डिवीजन के बाद प्लाट साइज कम से कम 500 वर्ग गज होना चाहिए।

उपाय तीन: हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने जिन सेक्टरों को विकसित कर उसे निगम को ट्रांसफर कर दिया है उस सेक्टर के पैसों में 40 फीसदी हिस्सा निगम को दिया जाए ताकि निगम सेक्टर को प्रॉपर मेनटेन कर सके। एचएसवीपी के करीब 800 कमर्शियल और 1200 रेजिडेंशियल प्लाट बने पड़े हैं। उन प्लाटों का ऑक्सन कर होने वाली आमदनी का 40 फीसदी निगम को दिया जाए।

ओल्ड फरीदाबाद शहर।

प्रॉपर्टी टैक्स की प्रमुख दरें: (रेजीडेंसियल)

300 वर्ग गज ग्राउंड फ्लोर- एक रुपए प्रति वर्गगज

300 से 500 वर्गगज- 4 रुपए प्रति वर्गगज

501 से 1000 वर्गगज- 6 रुपए प्रति वर्गगज

1000 से 9680 वर्गगज- 7 रुपए प्रति वर्गगज

9680 से अधिक की दर- 10 रुपए प्रति वर्गगज

कमर्शियल प्लाट

50 वर्गगज ग्राउंड फ्लोर-24 रुपए प्रति वर्गगज

51 से 100 वर्गगज-36 रुपए प्रति वर्गगज

101 से 500 वर्गगज-48 रुपए प्रति वर्गगज

501 से 1000 वर्गगज तक-60 रुपए प्रति वर्गगज

आश्वासन| फरीदाबाद में सीएम अनाउंसमेंट के कामों का सरकार अभी देगी पैसा

अभी निगम के टैक्स का ये है ढांचा

इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी

2500 वर्गगज तक-5 रुपए प्रति वर्गगज

2501 से दो एकड़ तक-6 रुपए प्रति वर्गगज

पावर| 200 वर्ग गज से अधिक के प्लाटों का सब डिवीजन कमिश्नर व मेयर कर सकेंगे

पानी-सीवर का टैक्स

वर्ष 2011 में घरेलू पानी कनेक्शन मीटर 1000 लीटर का 1.25 रुपए, बिना मीटर के 60 रुपए महीना, कमर्शियल कनेक्शनों से 1000 लीटर का मीटर रीडिंग से 4 रुपए फ्लैट का 60 रुपए प्रति 1000 लीटर जबकि औद्योगिक संस्थानों से 1000 रुपए प्रति 1000 लीटर शुल्क निर्धारित है। जबकि सीवर का शुल्क प्रति सीट 8 रुपए महीना। साल में महज 96 रुपए शुल्क निर्धारित है।

अब टैक्स की पड़ेगी मार, इसी वित्त वर्ष में पानी,सीवर व प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ सकता है

40 से 42 करोड़ के बीच है निगम का खर्च

निगम सूत्रों की मानें तो हर महीने निगम चलाने में 40 से 42 करोड़ रुपए खर्च होता है। जबकि विकास कार्य इससे अतिरिक्त है। यदि महीने का खर्च 40 करोड़ भी माना जाए तो सालाना करीब 480 करोड़ रुपए बैठता है। इस खर्च में कराए जाने वाले काम शामिल नहीं है।

मंथली ये हैं प्रमुख खर्चे:

सैलरी खर्च करीब 16 करोड़

पेंशन खर्च करीब 07 करोड़

बिजली बिल करीब 9 करोड़

आउट सोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन पर करीब 3.50 करोड़

डीजल , पेट्रोल व गोशाला खर्च करीब 1.25 करोड़

मेडिकल बिल करीब 25 लाख

310 नए चतुर्थ श्रेणीकर्मी का वेतन करीब 1.25 करोड़

जल्द ही बैठक कर अंतिम फैसला लिया जाएगा

मुख्यमंत्री को कई सुझाव दिए हैं जिन पर उनकी सहमति भी मिल गई है। निगम चलाने के कुछ टैक्स जैसे सीवर-पानी और प्रॉपर्टी टैक्स मंे बढ़ोतरी हो सकती है। निगम पार्षदांे के साथ बैठक कर फैसला लेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा है कि निगम अपने स्तर पर भी कुछ फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। टैक्स से जो पैसा आएगा वह लोगों पर ही खर्च किया जाएगा। -सुमन बाला, मेयर, नगर निगम

निगम को आय के साधन खुद बढ़ाने चाहिए

अब बगैर आत्मनिर्भर हुए काम नहीं चलने वाला है। यदि शहरवासियों को सुविधाएं चाहिए तो उन्हें जायज टैक्स भी देना चाहिए। 500 गज की कोठी वाला यदि 2000 हजार भी टैक्स नहीं देगा तो कैसे काम चलेगा। मेयर व पार्षदों के साथ बैठक कर प्रॉपर्टी, सीवर व पानी शुल्क काे रिवाइज किए जाने पर विचार होगा- -कृष्णपाल गुर्जर, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं स्थानीय सांसद।



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