क्योंकि उन्हें दूसरी फसल की बुवाई करने के लिए खेतों में गन्ना होने की वजह से परेशानी आ रही है। पिछले दिनों किसानों ने लघु सचिवालय पर भी धरना देकर डीसी से चीनी मील को सुचारू रूप से चलाने और चीनी मील में हुए घोटाले की जांच की मांग की थी। लेकिन कार्रवाई ना होने से नाराज किसानों को मजबूरन भूख हड़ताल पर बैठना पड़ा। धरना प्रदर्शन को समर्थन दे रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत का कहना है कि पलवल चीनी मील में कई वर्ष पहले एथनॉल प्लांट लगाने की मांग की गई थी। यदि वो लगा दिया जाता तो मील आज 300 करोड़ के घाटे में नहीं होती और न ही आज 25 करोड़ का कर्जा लेने की ज़रुरत पड़ती।
शुगल मिल परिसर में भूख हड़ताल पर बैठे किसान नारेबाजी करते हुए।
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