एमआईई क्षेत्र को संवारने के लिए 32 करोड़ की लागत से तैयार होने वाली सड़कों को नए सिरे से बनाने के लिए खोद ताे दिया गया, लेकिन सरकार की ओर से निर्माण कंपनी की पेमेंट तक नहीं होने के कारण कंपनी ने काम बंद कर दिया है।
दो माह से चल रहा छोटा-मोटा काम भी अब बंद हो गया है, क्योंकि पेमेंट नहीं मिलने के कारण कंपनी की लेबर भी वापस चली गई है। इससे परेशान कंपनी ने एक बार फिर से एचसअाईअाईडीसी के अधिकारियों से पेमेंट दिलवाने की गुहार लगाई। कंपनी ने अौद्योगिक क्षेत्र की अधिकतर सड़कें नए सिरे से बनाने के लिए खाेद दी, लेकिन तभी सीवर लाइन बिछाने का अादेश अा गया। छह माह से सरकार ने सीवर लाइन की ड्राइंग तक भी नहीं दी है, जिसके चलते खाेदी गई गलियां व सड़कें फैक्ट्री संचालकों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। ऐसे में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हालात : औद्योगिक क्षेत्र में खुले में पानी छोड़ने से जगह-जगह से टूटी सड़क, हादसे का डर
सड़क पर दूषित पानी छाेड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे
एचएसआईआईडीसी के सीनियर मैनेजर राजीव का कहना है कि एमआईई अभी पूरी तरह से उनके पास नहीं आया है, फिर भी यहां पर मेंटेंनस के कार्य कराए जा रहे हैं। यदि सड़काें पर फैक्ट्रियों का दूषित पानी छोड़ा जा रहा है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रावाई की जाएगी। वहीं कंपनी की पैंमेंट के बारे में भी अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा।
1977 में हुडा ने अलाॅट किए थे प्लाट
वर्ष 1977 में तत्कालीन सरकार की ओर से यहां पर हुडा को प्लाट दिए थे। इसके बाद हरियाणा विकास प्राधिकरण की ओर से इन प्लाटों को उद्योगपतियों को अलाॅट किया गया था। इस तरह एमआईई को बसे हुए लगभग 42 वर्ष हो गए हैं, लेकिन अब तक यह पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। एमआईई के साथ ही फ्री होल्ड की भी फैक्ट्रियों बहादुरगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में चल रही हैं।
सड़क पर छाेड़ा जा रहा फैक्ट्रियों का केमिकलयुक्त पानी
सीवर लाइन न बिछने के कराण एमआईई पार्ट-1 और 2 की सड़काें पर ही फैक्ट्रियों का केमिकलयुक्त पानी छोड़ना पड़ रहा है। वहां के उद्योगपतियों की वजह से बदहाल हुई हैं। अप्रोच रोड हो या मेन रोड फैक्ट्री मालिक फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे और केमिकलयुक्त पानी को सड़कों पर खुले में छोड़ रहे हैं। इसके पीछे फैक्ट्री मालिकों का तर्क है कि सीवरेज जाम हैं और गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था भी नहीं है। फैक्ट्री मालिक अपनी गलती छिपाने के लिए गंदगी का सारा इलजाम संबंधित विभाग पर ही थोंप देते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि ज्यादातर उद्योगपतियों ने सीवरेज के अवैध कनेक्शन किए हुए हैं और उनके कारण ही सीवरेज व्यवस्था ठप हो चुकी है।
इस क्षेत्र को विकसित हुए 42 साल से अधिक समय हो चुके है, लेकिन यहां पर समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसे में यहां पर आने वाले हर व्यक्ति को समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। यहां की सड़काें की खराब हालत फैक्ट्री संचालकों के कारण हो रही है,क्योंकि फैक्ट्रियाें से निकलने वाला गंदा और कैमिकलयुक्त पानी खुले में सड़काें पर छाेड़ना पड़ रहा है। इसके कारण सड़काें पर गहरे गड्ढे हो गए हैं और गड्ढों में पानी भरने से कई बार हादसे भी हो चुके हैं। आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र की अप्रोच सड़कें पूरी तरह से टूटकर पानी में तब्दील हो चुकी है। फैक्ट्रियाें में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि सड़काें पर पैदल चलकर फैक्ट्री में जाने में देरी भी हो जाती है और कई बार सड़काें के गड्ढों में गिरकर वे घायल हो रहे हैं। सीवर जाम होने से एक कमर्चारी की तो सीवर को देखते हुए िगरने से मौत भी हो चुकी है। रात के समय समस्या बेहद ही गंभीर हो जाती है।
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