दो माह से बालकुंज मंें रह रही किशोरी को मंगलवार को बाल कल्याण समिति की सदस्य ने परिवार के सुपुर्द किया। इस शर्त पर किशोरी को भेजा गया कि उसको पढ़ाया जाएगा। उसकी इच्छा के बिना उसकी शादी नहीं होगी। कहानी तीर्थ नगर की है। किशोरी का सौतेला पिता उसका विवाह जल्दी करना चाहता था, जबकि उसकी पढ़ाई करने की इच्छा थी। जब उसने विवाह का विरोध किया, लेकिन परिवार में किसी ने नहीं सुनी तो वह घर से भाग निकली। पुलिस के पास पहुंच कर सारी बात बताई। इस पर उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे बालकुंज भेज दिया गया। जिला बाल कल्याण समिति की सदस्या अल्का गर्ग ने बताया कि कुछ समय पहले किशोरी बालकुंज में बाल कल्याण समिति के माध्यम से आई थी। कुछ समय पश्चात काउंसलिंग में लड़की ने अपने परिजनों के पास जाने की इच्छाई जताई। लड़की के हित व कल्याण देखते हुए परिजनों को बालकुंज में बुलाया गया। परिजनों को हिदायत दी गई कि दोबारा से वो लड़की के साथ इस प्रकार की हरकत न करें। लड़की के परिजन सहमत हो गए और लड़की ने भी अपने परिजनों के साथ जाने की इच्छा जाहिर की। परिवार के लोगों ने भरोसा दिया कि वह उसकी शादी नहीं करेंगे। जब तक चाहेगी, उसे पढ़ाया जाएगा।
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