तीन मार्च से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है। होली से पहले ये आठ दिन तक का समय अशुभ माना गया है। इसलिए इस अवधि में शुभ कार्य करने की मनाही होती है। 9 मार्च को गोधूलि वेला में होली दहन होगा। 10 मार्च को दुल्हंडी का त्योहार
मनाया जाएगा।
पंडित प्रवीण ने बताया कि होलाष्टक के पहले दिन फाल्गुन शुक्लपक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल व पूर्णिमा को राहु का उग्र रूप रहता है। इस वजह से इन आठ दिन में मानव मस्तिष्क तमाम विकारों, शंकाओं और दुविधाओं आदि से घिरा रहता है। इसकी वजह से शुरू किए गए कार्य के बनने के बजाए बिगड़ने की संभावना ज्यादा रहती है। चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को इन आठ ग्रहों की नकारात्मक शक्तियों के कमजोर होने की खुशी में लोग अबीर-गुलाल आदि छिड़ककर खुशियां मनाते हैं। इसे होली कहते हैं। इस साल 9 मार्च को होलिका दहन होगा।
इस माह के मुहूर्त
फरवरी- 16, 19, 20, 21, 25, 26, 27, 28
मार्च- 1, 11, 12
अप्रैल- 2, 15, 16, 17, 20, 23, 26, 27
मई- 3, 4, 6, 7, 10, 17, 18, 20, 22
जून- 7, 10, 11, 12, 17, 29
जुलाई- 1
नवंबर- 25, 30
दिसंबर- 1, 7, 8, 9, 10, 11
28 को शादियों का ज्यादा मुहुर्त : 28 फरवरी को सबसे ज्यादा शादियां हैं। 14 मार्च को सूर्य के गुरु बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करने से फिर से एक महीने तक शहनाइयों की गूंज थम जाएगी। 14 मार्च से 13 अप्रैल तक सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने से मीन मलमास रहेगा। इस दौरान शादी ब्याह आदि मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। होलिका अष्टक नौ मार्च को होलिका दहन के बाद समाप्त हो जाएंगे। होलिका अष्टक में मांगलिक कार्य वर्जित है। 25 फरवरी में फुलेरा दूज पर सर्वाधिक सहालग होंगे।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/39HdqZZ